देवबंद। योगी सरकार द्वारा गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराने के विरोध में आज देवबंद स्थित दारुल उलूम में प्रदेश भर के मदरसों का सम्मेलन शुरू हो चुका है। इस दौरान मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सर्वे से घबराएं नहीं, सर्वे में सहयोग करें। सर्वे कराना सरकार का अधिकार है। मदरसों के अंदर किसी प्रकार की अवैध गतिविधि नहीं होती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की जमीन पर बना मदरसा वो खुद तोड़ेंगे। मदरसा अपनी जमीन पर बनाएं। हम सरकार के सभी सवालों के जवाब देंगे। मदनी ने कहा कि सर्वे के सवालों के जवाब देंगे। लेकिन अभी जो सर्वे की गाड़ी चल रही है, वह ठीक नहीं है।
रविवार सुबह एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया में शुरू हुए सम्मेलन में यूपी के 250 से अधिक मदरसों के संचालक शामिल हुए। ये सभी मदरसे दारुल उलूम से संबद्ध हैं। यह सम्मेलन प्रदेश में शुरू हुए गैर सरकारी मदरसों के सर्वे को लेकर बुलाया गया है। जिसमें विचार-विमर्श के बाद लाइन ऑफ एक्शन तैयार किया गया है। इसमें शामिल होने के लिए शनिवार सुबह से ही प्रदेश भर से प्रमुख उलमा देवबंद पहुंचने लगे थे। दारुल उलूम की आज़मी मंज़िल के मैदान में काउंटर लगाकर आने वाले मदरसा संचालकों की पूरी जांच के बाद ही एंट्री की गई। सम्मेलन में केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश दिया गया जिनको दारुल उलूम द्वारा बुलाया गया था।
एक तरफ मदरसा संचालक सर्वे में टीमों का भरपूर सहयोग कर रहे हैं। वहीं, वह दारुल उलूम के फैसले का बेसब्री के साथ इंतजार कर रहे थे। प्रदेश सरकार के आदेश पर 10 सितंबर से पूरे प्रदेश में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे शुरू हो चुका है। इसको लेकर उलमा प्रदेश सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।उलमा द्वारा पहले सीधे तौर पर कहा जा चुका है कि सरकार समुदाय विशेष को निशाना बना रही है। इसी के विरोध में इस्लामी तालीम के प्रमुख केंद्र दारुल उलूम में आज मदरसों का सम्मेलन बुलाया गया है।सरकारी सर्वे के विरोध में होने वाले मदरसों के सम्मेलन से मीडिया को दूर रखा गया है। मीडिया को अंदर जाने की मनाही रही, लेकिन उन्हें जानकारी देने के लिए मीडिया सेल बनाया गया है। जहां से उन्हें सम्मेलन से जुड़ी हर तरह की जानकारियां मिल सकेगी। मौलाना अरशद मदनी ने सर्वे के संबंध में मीडिया के सवालों के जवाब दिए। सम्मेलन के दौरान मदारिस इस्लामिया के नाजिम मौलाना मुफ्ती शौकत बस्तवी ने कहा मदरसे कभी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं पाए गए। मीडिया को मदरसों को लेकर सकारात्मक रवैया रखना चाहिए।

