अतीक अहमद के खिलाफ दर्ज 113 मुकदमों की फाइल गायब

उत्तर प्रदेशअतीक अहमद के खिलाफ दर्ज 113 मुकदमों की फाइल गायब

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अतीक अहमद के खिलाफ दर्ज 113 मुकदमों की फाइल गायब

  • प्रयागराज पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, दोषारोपण शुरू
  • गायत्री प्रजापति के खिलाफ गवाही देने वाला युवक अरेस्ट

लखनऊ ब्यूरो। प्रयागराज में बाहुबली अतीक के खिलाफ दर्ज मामलों की फाइल गायब हो गई है. प्रयागराज में मामला दर्ज हो गया है. उधर गायत्री प्रजापति मामले की पीडि़त महिला गायत्री के खिलाफ गवाही देने वाले राम सिंह नाम के युवक पर रेप का आरोप लगाया है. गिरफ्तारी हो गई है. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि अपराधि और पुलिस दोनों ही मेहनत कर रहे हैं. आइए जानते है क्या हुआ दोनों मामलों में…

पहला मामला

अतीक पर 113 मुकदमों की फाइल गायब

यूपी सरकार बाहुबलियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. इसमें यूपी सरकार एक तरफ बाहुबली अतीक अहमद पर शिकंजा कसा जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ अतीक से जुड़े एक सौ तेरह मुकदमों की फाइल थाने से गायब हो गई है. मुकदमों की केस डायरी व दूसरे दस्तावेज गायब होने से प्रयागराज पुलिस में हड़कंप मचा हुआ है. अब कोर्ट के रिकार्ड के सहारे इन फाइलों की डुप्लीकेट कॉपी तैयार करने की कवायद की जा रही है. इस मामले में प्रयागराज पुलिस के अफसरान ने अभी तक न तो कोई एफआईआर दर्ज कराई है और न ही फाइलें गायब होने वाले थाने धूमनगंज के पुलिस वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है. अफसरान पूरे मामले में महकमे का बचाव कर लीपापोती करने में जुटे हुए हैं.हालांकि एक ही दिन में दर्ज हुए अठारह साल पुरानी इन एफआईआर को इलाहाबाद हाईकोर्ट रद्द कर चुका है, लेकिन केस डायरी गायब होने की वजह से इन एक सौ तेरह मुकदमों में न तो चार्जशीट दाखिल हो सकी है और न ही फाइनल रिपोर्ट लगी है. यानी सरकारी रिकार्ड में इन मुकदमों का औपचारिक निस्तारण अभी नहीं हो सका है. ऐसे में मुकदमों की फाइल गायब होना प्रयागराज पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है. इस मामले में गलती किन पुलिसवालों की है, यह तय कर पाना थोड़ा मुश्किल इसलिए होगा, क्योंकि मामला अठारह साल पुराना है. फाइलें कब गायब हुईं, यह भी किसी को नहीं पता. इस असली जिम्मेदारी अठारह साल पहले मुकदमा दर्ज होने और हाईकोर्ट का आदेश आने के वक्त विवेचक व थाने में तैनात रहे दूसरे पुलिसकर्मियों की है.

दूसरा मामला

गायत्री प्रजापति को शनिवार को जमानत, गवाह की अगले दिन गिरफ्तारी

गायत्री प्रजापति पर रेप का आरोप लगाने वाली महिला ने गायत्री के खिलाफ गवाही देने वाले युवक पर लगाया रेप का आरोप लगाया है. युवक को अरेस्ट कर लिया गया है.राम सिंह नाम के इस आरोपी पर पीड़ित महिला ने ही गौतमपल्ली कोतवाली में 27 दिसम्बर, 2019 को एफआईआर लिखाई थी. इसमें राम सिंह के साथ दो अन्य लोग अंशू गौड़ उर्फ ऑशू और दिनेश चन्द्र तिवारी भी आरोपी बनाये गए थे. गायत्री को शनिवार को ही जमानत मिली है.एसीपी हजरतगंज राघवेंद्र मिश्र के मुताबिक चित्रकूट की पीड़ित महिला ने एफआईआर दर्ज करायी थी जिसकी जांच क्राइम ब्रांच कर रही थी.इस मामले में आरोपियों के खिलाफ दुराचार, छेड़छाड़, बंधक बनाने, धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में एफआईआर हुई थी. गौरतलब है कि

अतीक अहमद के खिलाफ दर्ज 113 मुकदमों की फाइल गायब

वर्ष 2019 में इस एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले ने गायत्री प्रजापति प्रकरण में फिर हड़कम्प मच गया था। इसी महिला के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गायत्री प्रजापति समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई थी.इस एफआईआर में नामजद छह आरोपी विकाश शर्मा, रूपेश, आशीष, पिंटू सिंह और दो अन्य गिरफ्तार हुए थे.गायत्री की गिरफ्तारी तक न होने से राजनीतिक गलियारों में इस प्रकरण ने तूल पकड़ लिया था.आखिर में पुलिस ने गायत्री प्रजापति को 18 फरवरी, 2017 को गिरफ्तार कर लिया था.इस मामले में गायत्री प्रजापति को शनिवार को ही जमानत मिली है. उसके दूसरे दिन ही महिला के दर्ज कराये गए दूसरे मुकदमे में राम सिंह को पकड़ा गया.बताया जाता है कि पहले राम सिंह पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति का करीबी रहा है.

अचानक की गई रेड

पीड़िता का आरोप था कि राम सिंह ने वर्ष 2016 में एच-3 ब्लॉक, पार्क रोड स्थित मकान में उसके साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया. इनके साथ अंशू व दिनेश भी थे. महिला ने इन लोगों पर अपनी नाबालिग बेटी से भी छेड़खानी व दुराचार करने का आरोप लगाया था.इस मामले में क्राइम ब्रांच ने राम सिंह को रविवार को गिरफ्तार कर गौतमपल्ली पुलिस के सिपुर्द कर दिया. यह गिरफ्तार अचानक की गई थी.शुरू में इस मामले को पुलिस संदिग्ध बता रही थी.

एक ही दिन में 113 मामले दर्ज

मुकदमों की फ़ाइल गायब होने का खुलासा अब उस वक़्त हुआ है, जब अतीक के खिलाफ दर्ज हुए पुराने मुकदमों की कुंडली खंगाली जाने लगी है. गौरतलब है कि साल 2002 में यूपी में मायावती की सरकार बनने के बाद अतीक के खिलाफ एक ही दिन में धोखाधड़ी के एक सौ तेरह मुक़दमे दर्ज किये गए थे. 17 सितम्बर 2002 को इलाहाबाद के धूमनगंज थाने में तत्कालीन व्यापार कर अधिकारी एचपी वर्मा और गीता सिंह ने सौ से ज़्यादा मामलों में अतीक के खिलाफ एक सौ तेरह एफआईआर दर्ज कराई थीं. अतीक ने बाद में इन एफआईआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ही नेचर के मामले और एक ही आरोपी होने के बावजूद एक एफआईआर दर्ज करने के बजाय एक सौ तेरह केस दर्ज किये जाने को गलत मानते हुए सभी एफआईआर को रद्द कर दिया था.

हालांकि हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर रद्द किये जाने का आदेश दिए जाने के बाद भी इन मुकदमों के विवेचक को हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए केस डायरी तैयार कर सम्बंधित मजिस्ट्रेट के यहां फाइनल रिपोर्ट पेश करनी चाहिए थी, लेकिन थाने में मौजूद रिकार्ड के मुताबिक़ ऐसा नहीं किया गया था, क्योंकि उसके कोई रिकार्ड नहीं थे. ऐसा करना इसलिए भी ज़रूरी था क्योंकि एक बार दर्ज एफआईआर सरकारी दस्तावेजों का हिस्सा हो जाती है और कभी भी उसकी ज़रूरत पड़ सकती है.

डुप्लीकेट कॉपी तैयार की जाएगी

इस बारे में प्रयागराज के एसएसपी अभिषेक दीक्षित का कहना है कि डिजिटलाइजेशन न होने से कई बार थानों के बहुत पुराने रिकार्ड या तो खराब हो जाते हैं या फिर फाइलों की भीड़ में गुम हो जाते हैं. उनके मुताबिक़ जांच के बाद ही साफ़ हो सकेगा कि इस मामले में किसी की लापरवाही है भी या नहीं. उनका दावा है कि ऐसे मुकदमों से जुड़े दस्तावेजों की एक कॉपी सीओ ऑफिस और एक कोर्ट में भी होती है. फाइलों को खोजने की कोशिश की जा रही है, अगर नहीं मिलती है तो सीओ आफिस व कोर्ट के दस्तावेजों के सहारे इनकी डुप्लीकेट कॉपी तैयार कराई जाएगी.

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