वाशिंगटन। अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद चीन ने इस पड़ोसी स्वायत्त क्षेत्र की पूरी तरह से सैन्य घेराबंदी की है। सैन्य अभ्यास के माध्यम से उसने ताइवान को डराने की कोशिश की है। इसे लेकर दोनों देशों व अमेरिका के बीच तनातनी है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के उप सहायक और एशिया प्रशांत मामलों के समन्वयक कुर्ट कैंपबेल ने चीन को लेकर एक बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा से ताइवान पर अपना स्वायत्त मानता है, लेकिन वह एक स्वतंत्र देश के रूप में उसका अस्तित्व स्वीकार नहीं कर रहा है। चीन उस पर अपना प्रभुत्व मानता है। इसी सिलसिले में कैंपबेल ने कहा कि चीन के कदम शांति व स्थिरता के खिलाफ हैं। आने वाले दिनों में चीन ये कदम और तेज कर सकता है। वह ताइवान पर दबाव की कार्रवाई लगातार कर रहा है और करता रहेगा। चीन का ये यह दबाव आने वाले हफ्तों और कई महीनों तक जारी रहेगा। इसका मकसद स्पष्ट रूप से ताइवान को डराना और उसकी आजादी को छीन लेना है।
कैंपबेल ने कहा अमेरिका ताइवान के खिलाफ चीन के कदमों को देखते हुए शांतिपूर्वक कदम उठाता रहेगा। जिससे कि क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनी रह सके। वह लंबे समय अपनी नीति के अनुसार ताइवान की मदद करता रहेगा। चूंकि चुनौतियां काफी लंबे समय तक रहने वाली है। इसलिए विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अमेरिकी कदम आने वाले हफ्तों और महीनों में नजर आएंगे। हम नहीं झुकेंगे और धीरज के साथ प्रभावी निर्णय लिए जाएंगे। अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानूनों की इजाजत के अनुसार ही जहां तक संभव होगा ताइवान के इलाकों में उड़ान भरना, उसकी समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही पूरी तरह से जारी रखेगा। इन कदमों में ताइवान के हवाई और समुद्री परिवहन शामिल है।
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कैंपबेल ने कहा कि अमेरिका ताइवान रिलेशंस एक्ट के तहत अपनी वचनबद्धताओं को हर हाल में पूरा करेंगे। इसमें में ताइवान आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करना और उसके खिलाफ ताकत के किसी भी प्रयास का विरोध करना शामिल है। ताइवान सुरक्षा, अर्थव्यवस्था या लोगों के जीवन को खतरे में डालने के किसी प्रयास का विरोध किया जाएगा। चीन द्वारा अमेरिका के साथ जलवायु परिवर्तन वार्ता स्थगित करने के मामले में उन्होंने कहा कि वो बीजिंग से उन चैनलों पर फिर से वार्ता शुरू करने का आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि कई देश इलाके में शांति और स्थिरता कायम रखने में रुचि रखते हैं।

