150 साल पुराने फांसीघर में आजादी के बाद से नहीं हुई किसी महिला को फांसी
परिवार के सात लोगों को मौत के घाट उतारने वाली शबनम को दी जायेगी फांसी
न्यूज डेस्क। अपने माता-पिता और 10 माह के भतीजे समेत परिवार के सात लोगों को मौत के घाट उतारने वाली शबनम की फांसी की सजा को राष्ट्रपति द्वारा भी बरकरार रखे जाने के बाद उसको फांसी देने की तैयारियां मथुरा जेल में शुरू कर दी गयीं हैं। इस चर्चित हत्याकांड के आरोपी शबनम को मिलने वाली फांसी को लेकर चर्चाओं का दौर चल रहा है क्योंकि आजाद भारत में पहली बार किसी महिला अपराधी को फांसी की सजा दी जायेेगी।
शबनम को मिलने वाली सजा के साथ मथुरा की जेल भी चर्चाओं में आ गयी हैै। क्योंकि मथुरा की जेल में बना फांसीघर यूपी का और शायद देश का भी इकलौता फांसीघर है जो सिर्फ महिला अपराधियों को फांसी देने के लिये बनाया गया है। हालंाकि 150 साल पुराने इस फांसीघर में आजादी के बाद से किसी भी महिला अपराधी को फांसी नहीं दी गयी है।
मथुरा की जेल में बना महिला फांसी घर इन दिनों चर्चा में है। शबनम को फांसी की सजा सुनाये जाने से पहले बहुत कम ही लोगों को यह पता होगा कि महिला अपराधियों के लिये उत्तर प्रदेश में अलग फांसीघर भी मौजूद है। अब मथुरा जेल के फांसीघर को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह फांसीघर बनाया क्यों गया था और ऐसी क्या खासियत है इस फांसीघर में जो महिला अपराधियों को फांसी की सजा यहां पर पूरी की जाती है। और जब आजादी के बाद से किसी महिला अपराधी को फांसी की सजा दी ही नहीं गयी तो इस फांसीघर को बनाये रखने का औचित्य क्या था।
जेल मैन्यूल 1956 के अनुसार मथुरा जेल में बने इस महिला फांसी घर में सिर्फ महिलाओं को ही फांसी दिये जाने की बात कही गयी है। हालांकि फांसी देने के तरीके में महिला कांस्टेंबल के द्वारा अपराधी को पकड़कर फांसी के फंदे तक लाये जाने के अलावा कोई फर्क नहीं होता। फिर भी 150 साल पहले मथुरा में महिला फांसी घर को बनाये जाने और उसको अब तक बरकरार रखने को लेकर अनेक तरह की बातें सामने आ रहीं हैं। इस संबंध में मथुरा जेल प्रशासन को भी किसी प्रकार की जानकारी नहीं है। मगर महिला जेल थी तो उसे अब तक बरकरार रखा गया है।
इस संबंध में एक तथ्य यह भी सामने आ रहा है कि भारत में अंग्रेजों के शासनकाल में भी महिलाओं को फांसी की सजा कम ही सुनाई जाती थी। क्योंकि महिला को फांसी देने पर जनता में आक्रोश फैलने का अंदेशा बना रहता था। ऐसे में अंग्रेज जनता खासकर राजधानी दिल्ली और आगरा में किसी प्रकार की अशांति नहीं चाहते थे। इसलिये ही अंग्रेजों ने दिल्ली से 150 किमी और आगरा से 50 किमी दूर मथुरा की जेल में महिला फांसीघर बनवाया था। अंग्रेजों के शासनकाल का तो रिकार्ड उपलब्ध नहीं है मगर आजाद भारत में किसी भी महिला अपराधी को फांसी की सजा नहीं दी गयी है। अब यदि हालातों में कोई बदलाव न आया तो शबनम पहली ऐसी महिला अपराधी बनेगी जिसे फांसी की सजा दी जायेगी। मथुरा जेल के महिला फांसीघर में शबनम की फांसी दिये जाने की तैयारी भी शुरू कर दी गयी है। डेथ वारंट जारी होते ही शबनम को फांसी दे दी जाएगी।
शबनम ने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों को मारा था
अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र के गांव बावनखेड़ी में रहने वाली शबनम का अपराध फांसी की सजा को भी कमतर ही ठहराता है। शिक्षक पिता की इकलौती बेटी शबनम ने अंग्रेजी और भूगोल में एमए किया था। उसके प्रेम संबंध पांचवी फेल और पेशे से मजदूर सलीम के साथ हो गये। संपन्न परिवार की बेटी शबनम के प्रेम प्रसंग का घरवाले विरोध कर रहे थे। सलीम के प्रेम में दीवानी शबनम ने 14 अप्रैल, 2008 की रात अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने माता-पिता और 10 माह के भतीजे समेत परिवार के सात लोगों को दवा खिलाकर बेहोश करने के बाद कुल्हाड़ी से काटकर मार डाला था। इस नृशंस हत्याकांड का सच जब सामने आया तो पूरा देश सकते में आ गया था। एक महिला के द्वारा ऐसा अपराध किये जाने की घटना ये लोगोें की रूह तक कांप उठी थी।

