Zeba Hasan
जिस पे यूं मर मिटे
लहरा वो झंडा
हर गली घर में है
लोहे का बंदा…
फिल्म ‘आरआरआर’ (Movie ‘RRR’) का यह गीत इन दिनों धूम मचा रहा है। फिल्म जल्द ही रिलीज होने वाली है लेकिन फिल्म से पहले राम चरण, जूनियर एनटीआर और आलिया भट्ठ पर फिल्माया गया सेलिब्रेशन ऐंथम ‘शोले’ हिट हो चुका है। इस गाने के साथ ही बॉलिवुड म्यूजिक कम्पोजर, सिंगर और सॉन्ग राइटर विशाल मिश्रा एक बार फिर से चर्चा में हैं। क्योंकि इस गीत को गाया है विशाल मिश्रा (Vishal Mishra) ने। पहले भी कई हिट गीतों को कम्पोज कर चुके, अपनी आवाज दे चुके विशाल उन्नाव के रहने वाले हैं और बॉलिवुड में अपना एक खास मुकाम बना चुके हैं। एक रिएलिटी शो में रिजेक्शन के 12 साल बाद कबीर सिंह के गीत ‘कैसे हुआ.. कैसे हुआ.. तू इतना जरूरी कैसे हुआ..’ गाने के लिए फिल्म फेयर का अवॉर्ड जीतने वाले विशाल ने रेस-3, जबरियां जोड़ी, नोट बुक जैसी फिल्मों में भी गाने गाए हैं। देश की हर भाषा में गाने की ख्वाहिश रखने वाले विशाल से हुई यह खास बातचीत।
‘आरआरआर’ टीम के साथ जुड़ना कैसा अनुभव रहा?
बहुत ही खूबसूरत। मैं खुशनसीब मानता हूं खुद को जो मुझे इस ऐंथम को गाने का मौका मिला। देश के जितने कर्मठ योद्या गुजरे हैं हमरा गीत उन्हें सलाम करता है। चार भाषाओं में यह गाना बना है। हिंदी के साथ दूसरी भाषाओं में गाना मेरे लिए चैलेंज था। इसके लिए मुझे प्रैक्टिस करनी पड़ी थी। लेकिन आज यह गाना सुपर हिट हो चुका है। हर लैंगवेज में लोग इसे पसंद कर रहे हैं। मेरे लिए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है कि लोगों का प्यार मुझे हर जगह मिल रहा है।
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इन दिनों आपके भोजपुरी एल्बम की चर्चा है, कोई खास लगाव भोजपुरी से?
मुझे हर उस भाषा से प्यार है जो अपने देश की है। जहां तक सवाल भोजपुरी का है तो मेरी परविरश ही अवधी और भोजपुरी भाषा के बीच हुई है। मैं हर रीजनल लैंगवेज में गाना चाहता हूं फिर वह चाहे हिमाचली हो या कश्मीरी। मुझे जो इस देश और अपने वतन की मिट्टी से मिला है उसे कुछ वापस भी तो करना है। जहां तक सवाल भोजपुरी गीतों में अश्लीलता का है तो हमने और मनोज जी ने अपने एल्बम दिलबरा से भोजपुरी संगीत में एक नई शुरुआत की है। इस गाने को मैंने कम्पोज किया है और मनोज तिवारी जी ने बड़े ही खूबसूरत अंदाज में इसे गाया है। यह गाना भी लोगों को काफी पसंद आ रहा है। भोजपुरी संगीत भी ऐसा बनाएंगे जिसे घर की बहू बेटियां सब मलकर देख सकें।

किस्मत और मेहनत दोनों में से आप ज्यादा भरोसा किसपर करते हैं?
सिर्फ ऊपर वाले पर भरोसा करता हूं मैं। जिंदगी में जो अच्छा होता है वह भी और जो बुरा होता है वह भी ऊपर वाले की मर्जी से ही होता है। लेकिन जो बुरा होता है उसमें भी इंसान के लिए कहीं न कहीं अच्छाई ही छिपी होती है। हां ऊपर वाले के बाद काम और किस्मत तो जरूरी है ही। किस्मत से काम मिलता है जिसे आप अपनी मेहनत से ही आगे बढ़ा सकते हैं।
कबीर सिंह के गाने के लिए सोचा था कि फिल्म फेयर मिलेगा?
जब भी कोई गाना बनता है तो यही सोच होती है कि बहुत अच्छा बना है। इस गीत के साथ भी ऐसा ही था। अब किसी को कम प्यार मिलता है तो किसी को ज्यादा। मेरे लिए यह अवॉर्ड किसी एक गाने के लिए नहीं बल्कि अपनी हर मेहनत के लिए मिला लगता है।
रिजेक्शन के दस साल बाद हाथ में ब्लैक लेडी ट्रॉफी को हासिल करने का श्रेय आप किसे देते हैं?
जहां तक श्रेय का सवाल है तो मैं यह क्रडिट फिल्म के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर को देता हूं जिन्होंने मुझपर भरोसा किया। बेशक ऊपरवाला और फिर मेरे माता पिता का भी योगदान मानता हूं। मैं हर पल ऊपर वाले का शुक्र अदा करता हूं जिसने मुझे संगीत की दुनिया में काम करने का मौका दिया। जिस वक्त मेरे हाथ में अवॉर्ड था मैं बिलकुल सुन था। हां उस वक्त मैं अपने पापा को बहुत मिस कर रहा था जो उस वक्त लखनऊ में थे। घर में जब टीवी पर मैं फिल्म फेयर अवॉर्ड देखता थ्ज्ञा तो वह मुझे बहुत डांटते थे। यह सब क्यों देखते हो मगर मैं उनकी बात नहीं सुनता था। मुझे एक लगाव सा था इस ब्लैक लेडी से।
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कैसा रहा उन्नाव से मुम्बई तक का सफर?
सच कहूं तो मुझे अभी भी यह सब सपने जैसा ही लगता है। लखनऊ के एक रियलिटी शो में हिस्सा लिया औश्र बस वहां से जैसे मेरे पैरों को पंख लग गए। कई हिट फिल्में, बड़े कलाकरों के साथ काम कर रहा हूं। जहां तक आने वाली फिल्मों का सवाल है तो इस साल 50 से 60 गाने कर रहा हूं। इसमें कई बड़ी फिल्मों के साथ मेरे सिंगल्स भी हैं। इस सफर में उतार-चढ़ाव भी आए, काफी स्ट्रगल भी रहे लेकिन अगर सबकुछ आसानी से हासिल हो जाए, बिना उतार-चढाव के तो जिंदगी बोरिंग हो जाएगी।

