पत्रकार आरती टिक्कू सिंह ने हाल ही में विस्तारा एयरलाइन पर यात्रा के दौरान परोसे जाने वाले सभी वेज खाने को “हिंदू खाना” और नॉन वेज खाने को “मुस्लिम खाना” बताने का आरोप लगाया और एयरलाइन पर खाने को कम्युनल बनाने का आरोप लगाया है और अब ये मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
पत्रकार आरती टिक्कू सिंह ने एयरलाइन से पूछा है आपको किसने बताया कि विमान में बैठे सभी हिंदू वेजीटेरियन हैं या सभी मुसलमान नॉन वेजीटेरियन हैं? उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि क्या अब आप फ्लाइट में सब्जियों, चिकन और यात्रियों को भी सांप्रदायिक बनाने जा रहे हैं?
अपने एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा, आपकी फ्लाइट में शाकाहारी खाने को “हिंदू खाना” और चिकन खाने को “मुस्लिम खाना” क्यों कहा जाता है? आप लोगों पर खाने के विकल्प क्यों थोप रहे हैं? आपको ऐसा करने का अधिकार किसने दिया? क्या अब आप प्लेन में सब्जियों, चिकन और यात्रियों को भी सांप्रदायिक बनाने जा रहे हैं? मैं इस बुरे व्यवहार से इतना हैरान हूं कि मैंने आपके आदेश का पालन न करने के लिए दोनों खाने बुक कर लिए।
पत्रकार ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से इस मामले पर कार्रवाई करने की अपील भी की। इस बीच, टिक्कू ने श्रीनगर से जम्मू तक के अपने टिकट का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें दिखाया गया है कि उन्होंने छोटी अवधि की उड़ान के लिए “हिंदू भोजन” और “मुस्लिम भोजन” बुक किया था। कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने टिक्कू को बताया कि एयरलाइन खाद्य कोड विस्तारा द्वारा तय नहीं किए जाते हैं, बल्कि पूरे उद्योग में मानकीकृत हैं। एवियालास कंसल्टेंट्स के सीईओ संजय लाजर ने लिखा, सामान्य विमानन भाषा में, हिंदू भोजन (HNML) जरूरी नहीं कि शाकाहारी भोजन हो – यह मांसाहारी भोजन भी हो सकता है जो हलाल नहीं है। उन्होंने समझाया, “इसी तरह मुस्लिम भोजन (MOML) मांसाहारी भोजन है जो हलाल है। जेट एयरवेज के पूर्व सीईओ संजीव कपूर ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी और कहा कि ये मानक अंतरराष्ट्रीय खाद्य कोड हैं जिनका उपयोग न केवल विस्तारा बल्कि वैश्विक स्तर पर जीडीएस-आधारित एयरलाइनों द्वारा भी किया जाता है।
