आगबबूला हुआ यूपी : एशिया का सबसे गर्म ज़िला बना बांदा, यूपी में 48 घंटे का रेड अलर्ट

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बुंदेलखंड समेत दक्षिणी यूपी भीषण गर्मी की चपेट में, बांदा में पारा 48.2 डिग्री पर पहुंचा; मौसम विभाग ने 11 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया

लखनऊ/बांदा/झांसी: उत्तर प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और लू की दोहरी मार झेल रहा है। बुंदेलखंड क्षेत्र आग के गोले में तब्दील हो चुका है। मंगलवार को बांदा लगातार दूसरे दिन देश का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया, जहां तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा हालात में बांदा केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि एशिया के सबसे गर्म इलाकों में शामिल हो गया है। तेज धूप, तपती हवाओं और उमस ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

भारतीय मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए प्रदेश में हीट वेव का रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार राज्य के 11 जिलों में रेड अलर्ट, 14 जिलों में ऑरेंज अलर्ट और 29 जिलों में यलो अलर्ट घोषित किया गया है। बुंदेलखंड और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के जिलों में हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं।

मंगलवार को झांसी, आगरा, प्रयागराज, उरई, हमीरपुर और कानपुर देहात सहित कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा दिखाई दिया। बाजारों में भीड़ कम रही और लोग घरों में रहने को मजबूर नजर आए। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और चक्कर आने की शिकायतों वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है जबकि कुछ स्थानों पर दोपहर बाद की कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। बिजली की बढ़ती मांग के चलते कई शहरों में कटौती की शिकायतें भी सामने आई हैं।

मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान और मध्य भारत से आने वाली बेहद गर्म और शुष्क हवाओं के कारण उत्तर प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ रहा है। हवा में नमी बेहद कम होने और बादलों की अनुपस्थिति ने हालात को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले दो दिनों में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं हुआ तो तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है।

गांवों में स्थिति और चिंताजनक बनी हुई है। खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। दोपहर के समय खेत पूरी तरह खाली दिखाई दे रहे हैं। पशुओं के लिए पानी और चारे का संकट भी गहराने लगा है। तालाब और छोटे जलस्रोत सूखने लगे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट बढ़ने की आशंका है।

हीट वेव के चलते रेल और सड़क यात्राएं भी प्रभावित हुई हैं। कई ट्रेनों में यात्रियों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ा। बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर लोग सिर ढककर और पानी की बोतलें लेकर सफर करते दिखाई दिए। डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

क्यों तप रहा है बुंदेलखंड?

विशेषज्ञों के अनुसार बुंदेलखंड में बढ़ती गर्मी के पीछे केवल मौसमी कारण ही जिम्मेदार नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों में तेजी से घटते जलस्रोत, पेड़ों की कटाई और सूखे की स्थिति ने इलाके के तापमान को और खतरनाक बना दिया है। बांदा, झांसी और हमीरपुर जैसे जिलों में जमीन की नमी लगातार कम हो रही है। इससे धरती तेजी से गर्म होती है और रात में भी तापमान नीचे नहीं उतर पाता।

जलवायु परिवर्तन का असर भी अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले मई के अंतिम सप्ताह में जो तापमान दर्ज होता था, अब वही हालात मई के मध्य में बन रहे हैं। लगातार बढ़ती हीट वेव की घटनाएं इस बदलाव का संकेत हैं।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि शहरों में कंक्रीट का विस्तार और हरित क्षेत्र कम होने से “हीट आइलैंड इफेक्ट” बढ़ रहा है। यही कारण है कि रात के समय भी लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।

प्रदेश में फिलहाल राहत के आसार कम दिखाई दे रहे हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 48 घंटे उत्तर प्रदेश के लिए बेहद कठिन साबित हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन और आम लोगों दोनों के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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