लखनऊ। ऊर्जा संरक्षण के लिए सरकार ग्राम समाज की खाली जमीनों पर पावर प्लांट भी लगा सकता है। जिससे कि आने वाले भविष्य में सौर ऊर्जा के जरिये उद्योगों को विद्युत आपूर्ति की जा सके। इतना ही नहीं औद्योगिक क्षेत्रों में बाग मॉडल एरिया को भी विकसित करने की योजना बनाई गई है।
इसके लिए नेडा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एक एमओयू कराना होगा। मंगलवार को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण द्वारा ईईएसएल, यूपी नेडा एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के सहयोग से ऊर्जा संरक्षण के पर आयोजित कार्यशाला में ये बिंदु निकलकर सामने आये।
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कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज सिंह, यूपी नेडा के सचिव अनिल कुमार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के निदेशक विनम्र मिश्रा और ईईएसएल के मुख्य महाप्रबंधक अनिमेश मिश्रा भी मौजूद रहे। इस मौके पर मनोज सिंहने ऊर्जा संरक्षण के लिए छोटे और महत्वपूर्ण कदम उठाये जाने पर जोर दिया।
उन्होंने उद्योगों में जीरो ईफेक्ट-जीरो डिफेक्ट तकनीक अपनाने और ग्राम समाज की जमीन पर ऑफग्रिड सोलर पावर सेंटर बनाये जाने का भी सुझाव दिया।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव आशीष तिवारी ने पंचामृत के दृष्टिकोण को अपनाते हुए 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 01 बिलियन टन की कटौती किये जाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के लिए तैयार किये जा रहे ‘स्टेट एक्शन प्लान’ में 09 मिशन को सम्मिलित किया गया है। जिसमें साल 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त किये जाने का रोड मैप तैयार किया गया है।
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मुख्य अतिथि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन के अपर मुख्य सचिव, नवनीत सहगल ने प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में से 04-05 क्षेत्र मसलन मुरादाबाद, वाराणसी, मुजफ्फरनगर में नई तकनीकी पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन दिये जाने के लिए मॉडल एरिया के विकल्प को अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने इस कार्य में तेजी लाने के लिए ईईएसएल, एमएसएमई, नेडा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच एक एमओयू तैयार किये जाने का प्रस्ताव दिया। एमएसएमई सेक्टर के अंतर्गत प्रस्तावित स्किमों के बारे में विनम्र मिश्रा और ईईएसएल के महाप्रबंधक गिरिजा शंकर ने विस्तृत जानकारी दी।
लो कार्बन बिल्डिंग ट्रांसिसन प्रोग्राम में एलडीए के उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी ने लखनऊ विकास प्राधिकरण में बिल्डिंग निर्माण और स्थल विकास में ऊर्जा संरक्षण के के लिए क्या प्रयोग किये जा सकते हैं, को लेकर अपने विचार रखे।
