- लॉकडाउन में टैक्स कलेक्शन तेजी से घटा है तो वहीं सरकार का खर्च तेजी से बढ़ा है
कोरोना आउटब्रेक के बीच शराब की दुकानों के खुलने को असमंजस की स्थिति यूपी में बनी हुई है. आखिर इन्हें खोलना क्यों जरूरी है. कई लोगों के जेहन में यह सवाल चल रहा है. आपकों बता दें कि यूपी में आबकारी टैक्स से यूपी गवर्नमेंट को लगभग 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व मिलता है. यूपी में सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने में करीब 18 करोड़ रुपए खर्च हो जाते हैं. मतलब साफ है कि यदि आबकारी से मिले टैक्स से ही यूपी के कर्मचारियों को वेतन दिया जा सकता है.
एमपी, हरियाणा में बांट सकते हैं वेतन
यूपी की तरह ही मध्यप्रदेश और हरियाणा का भी हाल है. हरियाणा में 6 हजार करोड़ और मध्यप्रदेश में तकरीब 10 हजार करोड़ रुपए का राजस्व आबकारी टैक्स से मिल जाता है. यह संख्या इन दोनों राज्यों में सरकारी कर्मचारी को दिए जाने वाले वेतन से ज्यादा है. इसलिए शराब की दुकानें सरकारें खोलना चाहती हैं. मौजूदा समय में केंद्र या राज्य सरकारें अपनी निधि से रुपए खर्च कर रहे हैं.
छत्तीसगढ़ में नहीं खुलेंगी शराब की दुकानें
छत्तीसगढ़ में शराब की दुकानें खोलने पर अभी मनाही है. 3 मई तक यह बंद रखी जाएंगी. सरकार का रुख साफ करते हुए कैबिनेट मिनिस्टर कवासी लखमा ने कहा, जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं होगा. 4 मई को इस मामले में चर्चा के बाद फैसला लिया जाएगा.
दिल्ली में तैयारी शुरू
राजधानी में 4 मई से शराब की दुकानें खोलने की तैयारी हो रही है. कंटनमेंट सील इलाकों के बाहर शराब की दुकानें खोली जाएंगी. चारों निगमों से लिस्ट मांगी गई है. गौरतलब है कि मिनिस्ट्री ने शुक्रवार को आदेश जारी किया है, जिसकी शर्त के अनुसार रेड जोन में घोषित जिले के सील जोन को छोड़कर बाकी इलाकों में आवश्यक वस्तुओं की दुकानों की छूट को लेकर केंद्रशासित और राज्य सरकारें निर्णय ले सकती हैं. इसे ही फैसले का आधार बनाया गया है.

