यूपी चुनावी दंगल 2022 – मेरठ कैंट: ‘भाजपा की छपरौली’ को भेदना विपक्ष के लिए बना टेढ़ी खीर

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यूपी चुनावी दंगल 2022 – मेरठ कैंट: ‘भाजपा की छपरौली’ को भेदना विपक्ष के लिए बना टेढ़ी खीर

लखनऊ/मेरठ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – पश्चिमी यूपी का मेरठ जिला और उसकी कैंट विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी के लिए अभेद्य किले के रूप में जानी जाती है। भाजपा के लिए मेरठ की कैंट सीट इसलिए अभेद्य मानी जाती है क्योंकि 1989 से लेकर अब तक इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा रहा है। यही कारण है कि इस सीट को भाजपा की छपरौली कहा जाता है। मेरठ की कैंट सीट भाजपा की अभेद्य सीट क्यों रही है, इस बात को समझने के लिए यह आंकड़े जानने बहुत जरूरी है। 2007 में बहुजन समाज पार्टी की लहर में भी मेरठ की कैंट सीट को भारतीय जनता पार्टी बचाने में कामयाब रही थी। उसके बाद 2012 में भी समाजवादी पार्टी की हवा थी लेकिन मेरठ कैंट सीट को वह भाजपा से छीन नहीं पाई। जबकि 2017 में भाजपा की लहर में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने 56% से ज्यादा वोट हासिल कर एक इतिहास कायम किया था।

क्या हैं सीट के समीकरण

मेरठ की कैंट सीट पर करीब 400000 मतदाता हैं जिसमें महिला और पुरुष लगभग बराबर की स्थिति में है। ऐसे में महिलाओं की यहां परिस्थिति निर्णायक मानी जाती है। महिलाओं का रुख यहां पर भारतीय जनता पार्टी के लिए हमेशा से मजबूत रहा है। आंकड़ों के हिसाब से 50.39 प्रतिशत पुरुष मतदाता है तो वही 49.61 प्रतिशत महिलाएं मतदाता के रूप में है। यहां से भाजपा, बसपा, सपा, कांग्रेस समेत 13 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।

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सपा यहां नहीं रही कभी टक्कर में

मेरठ की कैंट सीट पर हालांकि भारतीय जनता पार्टी के सामने कोई भी दल टिकता तो नहीं है लेकिन पिछले तीन चुनावों से देखें तो यहां पर दूसरे नंबर पर बहुजन समाज पार्टी रही है। जबकि समाजवादी पार्टी कभी भी यहां पर टक्कर में रहती हुई नहीं दिखाई दी है। जबकि इन तीनों चुनाव में दो बार congress बार समाजवादी पार्टी तीसरे नंबर पर रही है।

महिलाएं बदलतीं हैं दिशा

मेरठ कैंट सीट पर आमतौर पर महिलाएं निर्णय की स्थिति में होती हैं। कैंट सीट के आंकड़ों को देखें तो यहां पर महिलाओं के लिए पहली पसंद भारतीय जनता पार्टी रही है। इस बार भी हालात बहुत अलग नहीं है। महिलाएं खुलकर भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में बोल भी रही हैं और भाजपा का प्रचार भी कर रही हैं।

भाजपा का बढ़ा वोट प्रतिशत

मेरठ की कैंट सीट पर भारतीय जनता पार्टी का वोट प्रतिशत लगातार बढ़ता हुआ रहा है। 2007 में भाजपा को जहां 40.25% वोट मिले थे वहीं 2012 में यह घटा तो जरूर लेकिन 34.86 फ़ीसदी वोट के साथ प्रत्याशी जीतने में कामयाब रहा। लेकिन 2017 में भाजपा की लहर के दौरान मेरठ की कैंट सीट से भारतीय जनता पार्टी को रिकॉर्ड 56.2 परसेंट वोट मिले यानी कि कुल हुए मतदान का आधा से भी ज्यादा वोट भाजपा के खाते में गया।

2007 का परिणाम

भाजपा के सत्यप्रकाश अग्रवाल को 40.25 फीसदी वोट के साथ कुल 56 हजार 800 मत मिले। वहीं दूसरे नम्बर पर बसपा के सुनील कुमार वाधवा रहे जिन्हें 28.79 फीसदी वोट के रूप में 40 हजार 621 मत हासिल हुआ। जबकि सपा को मात्र 14.20 फीसदी मत मिला और 20 हजार 39 वोट से संतोष करना पड़ा।

2012 का परिणाम

भाजपा के सत्यप्रकाश अग्रवाल ने 34.86 फीसदी के साथ 70 हजार 820 वोट मिले। दूसरे नम्बर पर फिर बसपा के सुनील कुमार वाधवा ने 33.08 फीसदी के साथ 67207 मत हासिल किए, जबकि इस बार तीसरे नम्बर पर कांग्रेस के रमेश ढींगरा को 44 हजार 659 मत मिले। जो 21.98 फीसदी था।

2017 में सब पस्त

2017 में जीत की हैट्रिक लगाते हुए सत्यप्रकाश अग्रवाल ने रिकॉर्ड 1 लाख 32 हजार 518 वोट लिए, जो 56.20% था। दूसरे नम्बर पर बसपा के सतेंद्र सोलंकी को 23.70 फीसदी मत के साथ 55 हजार 899 वोट मिले। जबकि कांग्रेस के रमेश ढींगरा ने 39 हजार 650 वोट हासिल किए, जो 16.81% था।

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ये प्रत्याशी हैं मैदान में

मेरठ कैंट सीट से इस बार भाजपा ने अमित अग्रवाल को उतारा है। वहीं बसपा से अमित शर्मा तो सपा-रालोद गठबंधन से मनीषा अहलावत हैं। जबकि कांग्रेस ने अवनीश को टिकट दिया है। इसके अलावा अपनी जनता पार्टी से उपेंद्र कुमार, पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया, डेमाक्रेटिक ओम प्रकाश कनिक, शिवसेना से दीपक सिरोही, न्याय पार्टी से पवन कुमार धीमान, आप से मदन सिंह मान, राष्ट्रीय समाज पक्ष से राकेश प्रजापति, समग्र विकास पार्टी से डॉ.सुधीर अग्रवाल, निर्दलीय के रूप में दीपक सैनी, राजीव कुमार हैं।

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