नोएडा। यूपी चुनावी दंगल 2022 – नोएडा यानी गौतमबुद्ध नगर को प्रदेश के सबसे पहले जिले का दर्जा प्राप्त है। राजस्व वसूली के मामले में प्रदेश में नंबर वन रहने वाले इस जिले में भी इस बार चुनाव जातीय समीकरण पर हो रहा है। जिले में रहने वाली आबादी का करीब 70 फीसदी बाहरी लोग हैं। जबकि 30 फीसदी यहां के स्थानीय निवासी हैं। पढ़ी लिखी आबादी होने के नाते माना जाता है कि यहां पर चुनावी मुददे विकास,रोजगार,शिक्षा और स्वास्थ्य होने चाहिए। लेकिन यहां पर भी जातीय समीकरण सब पर भारी पड़ रहे हैं। प्रत्याशी चुनाव प्रचार के दौरान अन्य मुददों पर बात करने की बजाए जातियों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसी लिहाज से अपने चुनाव प्रचार को भी बढ़ावा दे रहे हैं । जिले में तीन विधानसभाएं आती हैं। जिनमें जेवर,नोएडा और दादरी शामिल हैं। इन तीनों विधानसभा क्षेत्र में सभी राजनैतिक दलों ने जातीय समीकरणों को देखकर ही स्टार प्रचारकों को प्रचार के लिए मैदान में उतारा है। इन तीनों विधानसभा क्षेत्रों में जिस जाति की अधिक जनसंख्या है वहां पर उसी जाति का नेता प्रचार के लिए भेजा जा रहा है।
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जिले की जेवर सीट इस समय हाट है। गत 19 जनवरी को जेवर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी दौरे के बहाने यहां के ठाकुर मतदाताओं को साधने का काम किया। सम्राट मिहिर भोज मामला सुर्खियों में आने के बाद गुर्जरों की नराजगी दूर करने के लिए भाजपा ने दनकौर इलाके में अपने गुर्जर नेताओं की पूरी फौज उतार दी है। इस पूरे इलाके में कृष्णपाल गुर्जर,सुरेंद्र नागर, नरेंद्र भाटी जैसे गुर्जर समाज के नेता गांवों में जाकर गुर्जरों को मनाने का काम कर रहे हैं। इस सीट पर गुर्जर,ठाकुर,जाट,ब्राह्मण मतदाताओं को साधने के लिए इन सभी जाति वाले नेताओं को उनके वोट बाहुल्य गांव में भेजा जा रहा है। भाजपा नही नहीं सपा-रालोद गठबंधन और बसपा ने भी जात की काट के लिए अपने इन्हीं जात के नेताओं को वोट के लिए मैदान में उतारा है। दादरी के दो लाख गुर्जरों को साधने के लिए भाजपा ने अपने गुर्जर नेताओं से यहां पर सभाएं करानी शुरू कर दी हैं। वहीं ठाकुर बाहुल्य गांव में नुक्कड़ सभाएं करायी जा रही हैं। इन नुक्क्ड सभाओं की जिम्मेदारी ठाकुर समाज के नेताओं को दी गई है। नोएडा और दादरी विधानसभा क्षेत्र में भी हर जाति के नेताओं की बड़ी फौज उतारी गई है। इन्हीं नेताओं को प्रचार की कमान दी गई है।

