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यूपी चुनावी दंगल 2022: ध्रुवीकरण की कोशिश को भाईचारे और स्थानीय मुददों से खत्म करने की कोशिश में गठबंधन


यूपी चुनावी दंगल 2022: ध्रुवीकरण की कोशिश को भाईचारे और स्थानीय मुददों से खत्म करने की कोशिश में गठबंधन

मेरठ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – चुनाव के पहले दौर में पश्चिमी उप्र के 11 जिलों में इस समय प्रचार अभियान बिल्कुल चरम पर है। पहले चरण को जहां भाजपा ध्रुवीकरण की ओर ले जाने की कोशिश में है। वहीं दूसरी ओर सपा रालोद गठबंधन और अन्य विपक्ष इसको रोकने का प्रयास कर रहे हैं। इस समय स्थानीय मुददे बिल्कुल हवा हो चुके हैं। जबकि बात मंदिर—मस्जिद,पाकिस्तान और जिन्ना की हो रही है। भाजपा वक्ता जनता के सामने इन्हीं मुददों के साथ हैं तो विपक्ष को इन मुददों की काट करने के लिए इनके नाम का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर योगी और अन्य नेता मुजफ्फरनगर दंगों की चर्चा सैकड़ों बार कर चुके हैं। भाजपा के दिग्गज नेता इन दंगों की याद दिलाकर पुराने घावों को हरा करने का काम कर रहे हैं। भाजपा के इस ध्रुवीकरण की काट के लिए सपा—रालोद के अखिलेश और जयंत भाईचारे का संदेश देते हुए पश्चिमी उप्र के जिलों का दौरा कर रहे हैं।

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अब जहां भाजपा नेता पहले जा रहे हैं वहां पर सपा रालोद का गठबंधन बाद में जाकर भाजपा के बयानबाजी की काट कर रहा है। ध्रुवीकरण के इस दांव पर अखिलेश और जयंत की जोड़ी पूरी तरह से सजग है। योगी के बयान ‘सपा की टोपियां रामभक्तों के खून से रंगी हैं।’ पर भी खूब बवाल मचा है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव क्षेत्र में भाईचारा लेकर पहुंच रहे हैं और पश्चिमी यूपी को साधने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। सपा रालोद गठबंधन स्थानीय मुददों को उठना चाह रहा है। लेकिन भाजपा जैसे ही जिन्ना,पाकिस्तान और दंगों का सुर छेड़ती है। गठबंधन के नेता इसका राजनीतिक काउंटर करने में लग जाते हैं। जबकि गठबंधन पश्चिमी के किसान के अलावा रोजगार और महंगाई के मुददों को उठाकर जनता के बीच जा रहा है। लेकिन जब जिन्ना और पाकिस्तान की बातें होने लगती है तो इस तरह के स्थानीय मुददे गौण हो जाते हैं। प्रदेश में पहले चरण का चुनाव आगामी 10 फरवरी को 58 सीटों पर होना है। इनमें पश्चिमी उप्र के 11 जिले शामिल हैं।

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