Site icon Buziness Bytes Hindi

यूपी चुनावी दंगल 2022: रात के अंधेरे में हो रहा चुनाव प्रचार, अंधेरा होते ही गांव में लगती है चौपाल


यूपी चुनावी दंगल 2022: रात के अंधेरे में हो रहा चुनाव प्रचार, अंधेरा होते ही गांव में लगती है चौपाल

मेरठ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – वर्चुअल चुनाव प्रचार के बीच अब निर्वाचन आयोग ने छोटी जनसभा करने की अनुमति दे दी है। जिसमें एक जनसभा में करीब 500 लोगों की भीड़ एकत्र की जा सकती है। लेकिन प्रत्याशियों ने अपने चुनाव प्रचार का तरीका पूरी तरह से बदल दिया है। अब प्रत्याशी रात के अंधेरे में गुपचुप तरीके से चुनाव प्रचार में जुटे हैं। गांव में रात के अंधेरे में चुनावी चौपाल सजाई जा रही है। जिसमें प्रत्याशी अपनी बातें ग्रामीणों के सामने रख रहे हैं। ऐसा सिर्फ गांव में ही नहीं बल्कि शहरी सीटों पर भी हो रहा है। गली—मोहल्लों में प्रत्याशी समर्थकों के घर पर जाकर 100 से अधिक लोगों की भीड़ को संबोधित करने का काम कर रहे हैं।

Read also: अमित शाह ने वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में की पूजा, मथुरा, दादरी और ग्रेटर नोएडा में करेंगे चुनाव प्रचार

निर्वाचन आयोग के डर के कारण देर रात ममें चोरी छुपे प्रत्याशी गांव जाकर चुनावी कैंपेन कर रहे हैं। लेकिन प्रत्याशियों के इस काम से जहां गांव में कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर कोरोना प्रोटोकाल की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है। चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशी तो बिना मास्क के रहते हैं साथ ही उनके साथ चलने वाले समर्थक भी बिना मास्क के चलते हैं।

Read also: अमित शाह का मिशन पश्चिमी उत्तर प्रदेश – कैराना से करेंगे चुनाव प्रचार की शुरूआत

इस कारण प्रत्याशी और समर्थक नहीं लगा रहे मास्क :

बता दे कि चुनाव प्रचार के दौरान न तो प्रत्याशी मास्क का उपयोग कर रहे हैं और न उनके समर्थक। मास्क न लगाने के पीछे प्रत्याशी का तर्क है कि जब वो मास्क लगाकर क्षेत्र में जाएंगे तो उनकेा पहचानेगा कौन। वहीं प्रत्याशियों के समर्थक इस कारण से मास्क नहीं लगाते कि प्रत्याशी अपने समर्थकों को मास्क लगाने पर कैसे पहचान सकते हैं। कुछ मिलाकर बिना मास्क के नेताजी और उनके समर्थक चुनाव प्रचार में जुटे हैं। रात में बिना मास्क के हो रहे चुनाव प्रचार पर निर्वाचन आयोग की भी निेगाह नहीं हैं। विधानसभा क्षेत्र में तैनात प्रेक्षक भी रात में कहां तक प्रत्याशियों पर नजर रख सकते हैं। वहीं विरोधी भी इस मामले में कुछ नहीं कर रहे हैं। क्योकि सभी प्रत्याशी आमतौर पर एक जैसा ही रवैया अपनाए हुए हैं। इसलिए एक—दूसरे की शिकायत भी करने से कतरा रहे हैं।

Exit mobile version