लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने यूपी विधानसभा चुनाव 2022 को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसके लिए उसने सरकारी खजाने का भी मुह खोलने से भी गुरेज नहीं किया। इसका ताज़ा उधारण है प्रदेश सरकार द्वारा मार्च 2022 तक मुफ्त राशन योजना का विस्तार किया जाना और पेट्रोल/ डीज़ल की कीमतों में कमी लाने के लिए वैट दरों में कटौती करना। हालांकि इसके इतर भी भाजपा ने यूपी में अपनी पार्टी और संगठन की पूरी शक्ति को सूबे में लगा रखा है, क्योंकि पार्टी जानती है कि 2024 का रास्ता यूपी के सहारे ही तय होगा। यही कारण है कि पिछले 20 दिनों में प्रधानमंत्री तीन बार और गृहमंत्री अमित शाह दो बार यूपी का दौरा कर चुके है।
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विशेषज्ञों के अनुसार भाजपा द्वारा कराये गए आंतरिक सर्वेक्षणों द्वारा मिल रहे फीडबैक और करोनाकाल की दूसरी लहर में योगी सरकार की विफलता के कारण भाजपा केंद्रीय नेत्रत्व आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर चिंतित और सतर्क है। यहीं कारण है कि भाजपा लोगों को मुफ्त खाद्यान्न देने जैसी लुभावनी योजनाओं का सहारा ले रही है क्योंकि योगी सरकार जानती है कि उसने साढ़े चार साल में लोगों से जो वादा किया था उसे पूरा नहीं किया है। बता दे कि 2017 में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को यूपी में करीब 40% फीसदी मत और 324 सीटें मिली थी। वहीं विभिन्न एजेसियों के सर्वेक्षण ये दिखा रहे है कि भाजपा इस बार भी करीब 100 सीटों के नुकसान के साथ सत्ता में वापसी कर सकती है लेकिन यह इतना आसान नहीं है।
गौरतलब है कि, यूपी सीएम ने प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार मार्च तक करने का ऐलान, अयोध्या में ‘दीपोत्सव समारोह’ के दौरान किया। जबकि यह योजना नवंबर 2021 में समाप्त होनी थी। योजना को बढ़ाने के साथ योगी ने कहा कि ‘सूबे कि सरकार केंद्र सरकार की वास्तविक योजना (प्रति व्यक्ति 5 किलो चावल या गेहूं और प्रति परिवार 1 किलो दाल) के साथ अब 1 लीटर खाद्य तेल के साथ 1 किलो नमक और चीनी भी उपलब्ध कराएगी ताकि एक परिवार की रसोई की बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा सके’।
वहीं इस योजना के अलावा सरकार का फोकस सूबे में हर वर्ग के वोटरो को साधने का भी है। यही कारण है कि प्रदेश में पिछले एक माह से पूर्वांचल में विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला या फिर शिलान्यास किया जा रहा है। चाहे वो कुशीनगर एयरपोर्ट का उदघाटन हो या फिर सूबे के 9 नए मेडिकल कालेजों की सौगात या फिर पीएम मोदी द्वारा 341 किमी. लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उदघाटन हो। इन सभी योजनाओं और फ्री स्कीमों से भाजपा पूर्वांचल के साथ-साथ प्रदेश के हर वर्ग के वोटरों को साधने का प्रयास कर रही है।
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बतादे कि भाजपा के रणनीतिकारों को यह मालूम हो चुका है, तीन कृषि कानूनों संबंधी बिल के कारण पश्चिम में उसे किसानों की नाराजगी के कारण अच्छी- ख़ासी सीटों पर नुकसान हो सकता है। इसलिए पार्टी पूर्वांचल में एक्सप्रेसवे और फ्री राशन का दांव चल रही जिससे इस क्षेत्र की करीब 164 सीटों में अधिक से अधिक सीटे जीतकर पश्चिम की भरपाई की जा सके।

