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UP Elections 2022: ओवैसी की यूपी में एंट्री और विपक्ष की मुसलमानों से दूरी से किसका होगा फायदा ?


UP Elections 2022: ओवैसी की यूपी में एंट्री और विपक्ष की मुसलमानों से दूरी से किसका होगा फायदा ?

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के करीब आते ही सूबे में राजनितिक सरगर्मी तेज हो गयी है। सभी पार्टियों ने यूपी के चुनावी रण को जीतने के लिए अपनी तैयारियाँ शुरू कर दी है। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की एंट्री ने भी सूबे में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

ओवैसी एक तरफ जहाँ खुलकर मुस्लिम कार्ड खेल रहे है और प्रदेश की 403 सीटों में से 100 मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान भी किया है। हालांकि उनके इरादों को शुरुआत में ही  जोरदार झटका तब लग गया, जब भारतीय सुहेलदेव पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने उन्हें गच्चा देते हुए समाजवादी पार्टी के साथ जाने का निर्णय किया।

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हालांकि, एक तरफ जहाँ Owaisi अल्पसंख्यक तुस्टिकरण की राजनीति से गुरेज नहीं कर रहे है। वहीं सपा, बसपा और कांग्रेस ने जिस तरह मुस्लिम नेताओं को अपने राजनीतिक मंचो और चुनावी पोस्टरों से बाहर रखा है, उससे किसका फायदा होगा यह बड़ा सवाल है? सूबे की सभी विपक्षी पार्टियों ने भाजपा के हार्ड हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद की काट के लिए सॉफ्ट हिन्दुत्व और मुसलमानो से दूरी बनाए रखने की रणनीति को अपनाया है।

बतादे, कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद, विपक्ष के लिए हिन्दुत्व मुद्दे से किनारा करना आसान नहीं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ओवैसी की मौजूदगी से भाजपा को ही फायदा होगा क्योंकि वो सपा और बसपा के मुस्लिम वोटों में ही सेंध लगाते नजर आएंगे, जिससे अंत में फायदा भाजपा को होगा। यूपी में करीब 19-20% फीसदी मुस्लिम वोटर है, जो सपा और बसपा के पारंपरिक वोटर हैं।

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गौरतलब है कि ओवैसी ने जो 100 सीटें यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के लिए चुनी है वो सभी मुस्लिम बाहुल्य वाली सीटें है। यूपी में करीब 20 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं । जिनका सूबे की करीब 143 सीटों पर  प्रभाव है। वहीं सूबे कि करीब 70 ऐसी सीटें हैं, जहां पर मुस्लिम आबादी 20 से 30 प्रतिशत के बीच है। जबकि लगभग 70 ऐसी सीटें हैं, जहां मुस्लिम वोटरो की संख्या  30 प्रतिशत से ज्यादा है, जहाँ AIMIM खासा ध्यान दे रही हैं। पश्चिम यूपी के करीब 5 ऐसे जिले है जहाँ मुस्लिम आबादी 40 फीसदी से भी अधिक है  इसलिए ओवैसी  ने अपने चुनाव प्रचार के लिए पश्चिम के मेरठ को चुना है।

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