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यूपी चुनाव 2022: भाजपा बाहरी नेताओं को पार्टी मे लेने से पहले सावधानी बरत रही है


यूपी चुनाव 2022: भाजपा बाहरी नेताओं को पार्टी मे लेने से पहले सावधानी बरत रही है

लखनऊ: उत्तर प्रदेश का चुनावी बिगुल फूंका जा चुका है। सभी दल अपने राजनीतिक नफा-नुकसान के हिसाब से चुनावी जोड़ तोड़ मे लग गए है कोई गठबंधन कर रहा है तो कोई दूसरे दलों के नेताओं पर डोरे डाल रहा है। वहीं प्रदेश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) उत्तर प्रदेश में इस बार दूसरे दलों से पार्टी में आने वाले नेताओं को लेने से पहले अतिरिक्त विचार कर रही है। इस बार पार्टी का शीर्ष नेत्रत्व पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं का राजनीतिक और जातीय समीकरण परखने के साथ पार्टी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर भी ध्यान दे रही है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव संगठन बीएल संतोष ने यूपी के क्षेत्रीय संगठन प्रभारियों को खास हिदायत देते हुआ दूसरे दलों से आने वाले नेताओं की पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता के साथ उनकी यूपी चुनाव 2022 और 2024 लोकसभा की रणनीति को भी परखने को कहा गया है। इसके पीछे भाजपा का बंगाल का कटु अनुभव है जहां चुनाव से पहले कई विपक्षी नेता भाजपा में शामिल तो हुए, लेकिन विपरीत चुनाव परिणाम के बाद पार्टी छोड़ कर चले गए।

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भाजपा ने बंगाल के अनुभव से सबक लेते हुए यूपी में चुनावी समीकरण साधने के लिए प्रदेश में नई जॉइनिंग कमेटी का गठन किया है जिसका अध्यक्ष सूबे के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को बनाया है। वहीं इस महत्वपूर्ण कमेटी में अध्यक्ष के अलावा दोनों उपमुख्यमंत्री, दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य को स्थान देने के साथ भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह को भी इसमें शामिल किया गया है। यह कमेटी अब नये आगुनतकों को पार्टी में लेने से पहले केंद्रीय नेतृत्व को सुझाव देगी। गौरतलब है कि भाजपा के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए बहुत सारे दलों के नेताओं ने भाजपा का दामन थामा है जिसका विरोध पार्टी के भीतर और स्थानीय संगठन द्वारा हुआ है।  

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पश्चिम बंगाल से मिला सबक

विदित है कि चुनाव के दौरान नेताओं की आवाजाही लगी रहती है लेकिन इस बार भाजपा नये नेताओं को लेने से पहले पूरा (Due Diligence) करना चाहती है  इसलिए इस कमेटी का गठन किया गया है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पार्टी ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में अन्य दलों के नेताओं का स्वागत किया था लेकिन बाद में विपरीत परिणाम के चलते लोग पार्टी छोड़ चले गए और भाजपा को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।

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