मेरठ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – मुस्लिम और बीजेपी जहां भी इनके नाम आते हैं दोनों को एक दूसरे के विरोधी बताया जाता है। लेकिन बदलते समय में मुस्लिमों के बीच भाजपा की पहचान बनी है तो भाजपा ने भी मुस्लिमों को विश्वास पूरे पांच साल रखा है। ये हम नहीं कह रहे ये कहना है डा0सैयद रिहान का। जो कि मेरठ में चिकित्सक हैं और पिछले 40 साल से देश की बदलती राजनीति देख रहे हैं। मेरठ के कोटला में रहने वाले नईम सीसीएसयू विवि से स्नातक पास हैं। उनका कहना है कि इस बार 2017 से पूरे पांच साल भाजपा रही। हमको तो कहीं कुछ डर नहीं लगा। लोगों ने वैसे ही कह रखा था कि योगी राज आ गया है। अब मुस्लिमों पर जुल्म होंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा इससे पहले तो सपा सरकार थी।
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उन्होंने कहा सरकार साधन उपलब्ध कराने का काम करती है। योगी के कार्यकाल में कानून व्यवस्था बेहतर रही और अपराधियों पर लगाम लगी। यह बड़ी उपलब्धि है। कोटला में ही इलेक्ट्रानिक दुकान मालिक नदीम खान का कहना है कि योगी के साथ अगर मुसलमान नहीं होता तो 2017 में भाजपा इतने बंपर वोटों से नहीं जीत सकती थी। मुसलमानों के कारण ही भाजपा चुनाव जीतकर सरकार बनाने में कामयाब हुई है। ये बात सिर्फ नदीम और नईम की नहीं है। मेरठ के शहरी विधानसभा की मिली जुली बस्ती और मुसलमान बाहुल्य इलाकों में रहने वाले युवाओं ने अब राजनीति पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। उन्हें पता है कि उनका हित और अहित कहां पर हैं। इसलिए आज भाजपा और मुसलमान दोनों एक दूसरे के लिए अछूत नहीं रहे। चुनावी हलचल पर हालांकि कोई खुलकर बात नहीं करता लेकिन शकील अहमद जो कि करीब 78 साल के हैं उनका कहना है कि जनता का मूड रेत के टीले जैसा है। जिसके बारे में कोई नहीं जान सकता।
कभी स्थानीय राजनीति तक सीमित रहने वाली मुस्लिम बिरादरी अब सियासत को प्रदेश से लेकर देश तक जानने की समझ रखती है। यहीं कारण है कि आज चुनाव के समय सभी राजनीतिक दल इस समाज के वोट के लिए पसीना बहा रहे हैं। सपा केा भी यह पता है कि मुस्लिम अब उसकी जागीर नहीं रहा। बसपा को भी समझ आ गया। कांग्रेस को मुसलिम पहले ही समझ चुके हैं और भाजपा को परख रहे हैं। मुसलिम राजनीति पर बारीकी से नजर रखने वाले डा0 सैयद अली का कहना है कि मुसलमानों के चेहरे को कुछ दलों ने समाज और देश के सामने बड़ी क्रूरता के साथ रखा है।
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यहीं कारण है कि आज मुसलमानों को हेय की दृष्टि से देखा जाता है। लेकिन अब मुसलमानों की युवा पीढ़ी अपने वजूद को समझ रही है। इसलिए ही अब उसके लिए भाजपा भी विकल्प के रूप में हैं। यानी मुसलमान भाजपा केा वोट करने में भी पीछे नहीं रहेगा। सांप्रदायिक हिंसा को लेकर घिरने वाली भाजपा सरकार में पिछले 5 साल में एक भी दंगा नहीं हुआ। इससे मुसलमानों में भाजपा शासन के प्रति जो धारणा अन्य दलों ने बनाई थी वह भी खुल गई है। मुसलमान आज विकास के मुदे पर भी मतदान कर सकता है। सिराज का कहना है कि जब हमने मजहब के नाम पर वोट मांगा जाता है तो क्या हम खुद अपनी समझ से विकास के नाम पर वोट नहीं कर सकते।

