यूपी चुनावी दंगल 2022: पूर्वांचल में टिकट बंटवारे में सपा की डगर होगी कठिन, सहयोगी बनेंगे चुनौती

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यूपी चुनावी दंगल 2022: पूर्वांचल में टिकट बंटवारे में सपा की डगर होगी कठिन, सहयोगी बनेंगे चुनौती

लखनऊ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – समाजवादी पार्टी के टिकट वितरण मामले में चुनौतियां पूर्वांचल में और कठिन होने वालीं हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कि पूर्वांचल में बसपा समेत दूसरे दलों के बड़े नेताओं की आमद के अलावा गठबंधन के कई सहयोगी भी हैं। ऐसे में सपा के कैडर कार्यकर्ताओं और नेताओं को एक बार फिर इंतजार करना पड़ सकता है। गुरूवार को भी सपा मुख्यालय में कई विधानसभाओं से आये नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। पूर्वांचल में सपा का एक अपना मजबूत कैडर है, ऐसे में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल (कमेरावादी), जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट), प्रसपा के अलावा स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान, लालजी वर्मा, राम अचल राजभर जैसे नेताओं की आमद ने इनकी बेचैनी बढ़ा दी है।

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सहयोगियों का है अच्छा खासा प्रभाव

ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा से 2017 में चार विधायक बने थे। राजभर समाज की आबादी करीब 4 फीसदी से ज्यादा मानी जाती है। पूर्वांचल के कई जिलों में इस जाति का खासा प्रभाव है। राजभर की पार्टी ने हरदोई की दो सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। ऐसे में वह पूर्वांचल में भी ठीक-ठाक सीटों की मांग कर सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि वह कम से कम 15 सीटें पूर्वांचल से मांगेंगी। इसके अलावा डॉ. संजय सिंह चौहान वाली जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) की मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, बनारस, चंदौली जैसे जिलों में खासा प्रभाव है। करीब 20-25 सीटों पर चौहान यानी नोनिया समाज निर्णायक स्थिति में हैं। इस बीच दारा सिंह चौहान भी सपा के साथ आ गये हैं। इसके अलावा अपना दल भी बड़ी उम्मीदों के साथ सपा गठबंधन का हिस्सा बनी है। पूर्वांचल में करीब 165 सीटें हैं। ऐसे में यह क्षेत्र सियासी लिहाज से खासा महत्वपूर्ण है।

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अखिलेश के लिए बड़ी चुनौती

पूर्वांचल की 165 सीटों पर बंटवारे को लेकर अखिलेश के सामने कठिन चुनौती है। क्योंकि पूर्वांचल में सपा के कई दिग्गज नेता पहले से ही हैं। ऐसे में दूसरे दलों से आने वाले नेताओं और गठबंधन के सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाना उनके लिए कठिन चुनौती होगी।

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