Site icon Buziness Bytes Hindi

यूपी चुनावी दंगल 2022: मेरठ कैंट विधानसभा सीट पर गठबंधन प्रत्याशी के खिलाफ सुलग रही बगावत,सपा भी नहीं पचा रहे उम्मीदवार


यूपी चुनावी दंगल 2022: मेरठ कैंट विधानसभा सीट पर गठबंधन प्रत्याशी के खिलाफ सुलग रही बगावत,सपा भी नहीं पचा रहे उम्मीदवार

मेरठ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – बागपत की छपरौली,बडौत और मेरठ की सिवालखास सीट पर प्रत्याशियों को लेकर मचा घमासान अब मेरठ तक पहुंच चुका है। गठबंधन की मेरठ कैंट प्रत्याशी मनीषा अहलावत को लेकर रालोद और सपा दोनों ही पार्टियों के भीतर असंतोष सुलग रहा है। मनीषा अहलावत को रालोद ने अपने टिकट पर मेरठ कैंट की सीट पर उतारा है। बता दे कि मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र भाजपा का गढ रहा है। इसको भाजपा ने कांग्रेस से 90 के दशक में छीना था। उसके बाद से यह सीट भाजपा के पास ही है। इस बार सपा और रालोद गठबंधन होने से माना जा रहा था कि इस सीट पर सपा या फिर रालोद का कोई पुराना कददावर नेता चुनाव मैदान में उतरेगा। लेकिन ऐन मौके पर रालोद अध्यक्ष ने मनीषा अहलावत को गठबंधन से प्रत्याशी घोषित किया। बता दे कि मनीषा अहलावत पूर्व विधायक चंद्रवीर सिह की बेटी हैं। मनीषा अहलावत की घोषणा के बाद से रालोद और सपा नेताओं का उत्साह ठंडा पड़ गया है। दोनों पार्टियों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में भीतर ही भीतर गम और गुस्सा उबल रहा है।

Read also: मणिपुर विधानसभा चुनाव – भाजपा ने जारी की 60 उम्मीदवारों की सूची, सीएम बीरेन सिंह हेंगेंग से लड़ेंगे चुनाव

लेकिन ये गम और गुस्सा बाहर नहीं आने दे रहे। हालांकि गठबंधन प्रत्याशी मनीषा अहलावत के साथ दोनों ही दलों के कार्यकर्ता लगे हुए हैं। चुनाव में जो उत्साह दिखाई देना चाहिए वह नहीं दिख रहा है। हालांकि कुछ कार्यकर्ताओं ने जयंत चौधरी को इस बारे में पत्र भेजकर अपना विरोध दर्ज किया है। बता दे कि इस सीट को सपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता अपने खाते में मानकर चल रहे थें। सपा के कुछ दिग्गज नेता चुनाव के लिए पिछले काफी समय से मेहनत भी कर रहे थे। लेकिन जब मनीषा अहलावत के नाम की घोषणा हुई तो सबका उत्साह ठंडा पड़ गया है। रालोद के पूर्व पदाधिकारी की माने तो रालोद और सपा ने मनीषा को प्रत्याशी बनाकर यह सीट भाजपा को तोहफे में दे दी है। हालांकि ये पदाधिकारी अब पार्टी में नहीं हैं। लेकिन वे प्रत्याशियों की घोषणा से काफी आहत हुए और उन्होंने रालोद से ही त्यागपत्र दे दिया है। उनका कहना है कि मनीषा अहलावत को क्षेत्र में कोई नहीं जानता। पार्टी को ऐसे लोगों को टिकट देना चाहिए था जो कि जनता के बीच का होता। हालांकि मनीषा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनाव लड़वाने का आहवान कर रही हैं। सपा और रालोद के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उनके साथ खड़े तो हैं लेकिन मन कहीं और ही है। ऐसे में मनीषा अहलावत की राह और कठिन हो सकती है।

Exit mobile version