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पहले चरण में भाजपा को नुकसान की अटकलें,जाट और मुस्लिम मिलकर बन सकते हैं चुनौती


पहले चरण में भाजपा को नुकसान की अटकलें,जाट और मुस्लिम मिलकर बन सकते हैं चुनौती

लखनऊ। पहले चरण का चुनाव गत 10 फरवरी को हो चुका है। जिसमें मेरठ सहित पश्चिमी उप्र के 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदान हुआ था। चुनाव होने के बाद भी इन सीटों पर हारजीत का गुणाभाग लगाया जातर है। आंकलन लगाया जा रहा है कि पहले चरण का यह चुनाव भाजपा के लिए नुकसान देह साबित होगा। ऐसा चुनावी चर्चा करने वालों का मानना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में अब विधानसभा चुनाव (Assembly elections) के लिए मतदान खत्म हो चुका है। ऐसे में यहां पर दलों के लिए जीतहार का अनुमान और दौर चल रहा है। यह भी माना जा रहा है कि अगर इस चुनावी चरण में मुस्लिम और जाट मतदाता मिलकर कही भाजपा के लिए चुनौती बन सकते हैं।

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विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने करीब एक महीने पहले कहा था कि यह चुनाव 80 बनाम 20 वाला होगा। उनके इस बयान को विवादित करार दिया गया था। जिसकी चर्चा चुनाव के दौरान खूब हुई थी। मेरठ में तो यहां तक कह दिया गया था इस बार लड़ाई 60 बनाम 40 के बीच है।

मेरठ में मतदान से एक दिन पहले लोगों की राय ली गई थी तो एक व्यक्ति शकील ने कहा था “शहर में करीब 40 प्रतिशत मुस्लिम वोटर है और सभी ने सपा और रालोद गठबंधन (SP and RLD alliance) को वोट देने का फ़ैसला किया है। उन्होंने कहा था कि यहां पर भाजपा के पास किसी तरह का मौका नहीं है। मेरठ की सभी सात सीटों मेरठ शहर, मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण, मेरठ सिवालख़ास, मेरठ सरधाना, मेरठ हस्तिनापुर और मेरठ किठौर में भाजपा और गठबंधन के बीच टक्कर है। जिले की सभी सात सीटों पर गत 10 फ़रवरी को मतदान हुआ था। जिले में कुल 60.1 प्रतिशत मतदान हुआ था। पश्चिमी उप्र में नए राजनीतिक समीकरण बनकर उभर रहे हैं। कृषि क़ानूनों को वापस लेने के बाद भी भाजपा से नाराज़ जाटों का समर्थन पाने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तक को आना पड़ा। वहीं किसानों को अपने पक्ष में करने के लिए सपा के अखिलेश यादव को आरएलडी के जयंत चौधरी से गठबंधन करना पड़ा।

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चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने घर-घर अभियान चलाया और सपा पर गुंडाराज चलाने के आरोप लगाने के साथ ही जाटों तक पहुँचने की भरसक कोशिश की थी। पश्चिमी इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के मतदाताओं की राय हर गली मोहल्ले में बंटी हुई है। कोई भाजपा के जीत पर भरोसा जताते हैं तो कोई सपा की जीत पर इतरा रहे हैं। कुछ का कहना है कि भाजपा सरकार में गुंडागर्दी कम हुई तो वहीं ग़रीबों को दो बार महीने में मुफ़्त राशन भी दिया गया। वहीं कुछ का मानना है कि 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे में जाट-मुस्लिम एकता जो टूट गई थी। इस बार 2022 में फिर से जुड़ गई है। उनको उम्मीद है कि इस बार सपा और रालोद गठबंधन इस इलाके में बढ़िया जीत दर्ज करेगा।

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