लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने यूपी में इतिहास रच दिया है। हालांकि, इतिहास के इस नये अध्याय के बीच तमाम कोशिशों के बाद भी मुख्तार के किले को भाजपा भेदने में नाकामयाब ही रही है। इतना ही नहीं भाजपा को आजमगढ़, बलिया और गाजीपुर में भी अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। इन सबके बाद भी भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। हालांकि खबर लिखे जाने तक भाजपा को करीब 268 सीटें मिलतीं दिख रहीं हैं। हालांकि, 2017 के चुनावी परिणामों पर नजर डालें तो बीजेपी और उसके सहयोगियों को करीब 57 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है। हालांकि अंतिम परिणाम आने तक इसमें फेरबदल होने की संभावनायें हैं।
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मऊ में फिर से एक सीट पर संतोष
मऊ में चार विधानसभा सीटें हैं। जिसमें मऊ सदर, मधुबन, घोसी और मुहम्मदाबाद गोहना है। मऊ सदर सीट पर पूरे देश की नजर थी। क्योंकि, इस सीट से बाहुबली मुख्तार अंसारी लगातार तीन दशक से जीतते आ रहे थे। लेकिन, इस बार उनकी सीट से उनके बड़े बेटे अब्बास अंसारी को सपा की सहयोगी सुभासपा ने उतारा था। उनके सामने भाजपा के अशोक सिंह और बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर की चुनौती थी। भाजपा ने यहां से अब्बास को हराने के लिए पूरा जोर लगा दिया था। लेकिन, अब्बास ने खबर लिखे जाने तक करीब 40 हजार के रिकॉर्ड अंतराल से जीत दर्ज कर ली थी। हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा होनी बाकी थी। वहीं मधुबन सीट से भाजपा के रामविलास चौहान को जीत मिली है, जो बिहार के राज्यपाल और भाजपा के दिग्गज नेता फागू चौहान के बेटे हैं। वहीं घोसी विधानसभा से भाजपा के बागी कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान एक बार फिर चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं। उन्होंने भाजपा के विजय राजभर को करीब 20 हजार मतों से मात दी है। वहीं मुहम्मदाबाद गोहना से सपा के राजेंद्र कुमार ने जीत हासिल की है। उन्होंने भाजपा की पूनम सरोज को मात दी है।
आजमगढ़ में सपा का क्लीन स्वीप!
आजमगढ़ को आमतौर पर सपा और बसपा का गढ़ माना जाता है। यहां पर दस विधानसभा सीटें हैं। 2017 में यहां पर भाजपा ने मात्र एक सीट जीती थी। वहीं बसपा ने चार और सपा ने पांच सीटों को अपने नाम किया था। इस बार के चुनाव में जिस सीट यानी फूलपुर पवई से भाजपा ने विजय हासिल की थी, वहां से सपा ने रमाकांत यादव को उतार दिया था। जबकि, पिछली बार उनके बेटे अरुण को भाजपा ने यहां से टिकट दिया था और वो विधायक बने थे। इसके अलावा बसपा ने मुबारकपुर, सगड़ी, दीदारगंज और लालगंज को अपने नाम किया था। वहीं सपा ने सदर, गोपालपुर, मेंहनगर, अतरौलिया और निजामाबाद पर फतह हासिल की थी। 2022 के चुनाव में बसपा के तीन विधायक सपा और भाजपा के साथ हो लिये थे। जिसमें मुबारकपुर के गुड्डू जमाली को सपा ने टिकट नहीं दिया तो वो एआईएमआईएम, सगड़ी की वंदना सिंह ने भाजपा और दीदारगंज के दिग्गज नेता सुखदेव राजभर की मृत्यु के बाद उनके बेटे कमलाकांत राजभर ने सपा से चुनाव लड़ा था। खबर लिखे जाने तक यहां की पांच सीटों लालगंज, मेंहनगर, दीदारगंज, फूलपुर पवई और निजामबाद को जीत लिया था। बाकी की पांच सीटों पर भी सपा की बड़ी बढ़त बनी हुई थी।
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गाजीपुर में भी बीजेपी का सफाया!
गाजीपुर की भी सात सीटों पर भाजपा का लगभग सफाया हो चुका है। गाजीपुर में सदर, जखनियां, जहूराबाद, सैदपुर, जंगीपुर, जमानियां और मुहम्मदाबाद सीटें हैं। मुहम्मदाबाद सीट (Muhammadabad seat) से मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह को 2017 में उनकी धुर विरोधी भाजपा की अलका राय ने मात दी थी। इस बार सिबगतुल्लाह के बेटे सुहेब अंसारी मन्नू को उतारा गया था। खबर लिखे जाने तक मन्नू अंसारी ने अलका राय को हरा दिया था। वहीं जहूराबाद से ओम प्रकाश राजभर, जमानियां से ओमप्रकाश सिंह, जंगीपुर से वीरेंद्र यादव, सैदपुर से अंकित भारती और जखनियां से बेदी राम चुनाव जीत चुके थे। वहीं सदर सीट पर सपा और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है, जिसमें बीजेपी की संगीता बलवंत पीछे चल रही थीं। इस सीट से अब तक कोई भी दोबारा चुनाव नहीं जीत सका है। 2017 के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां पर बीजेपी और उसकी तत्कालीन सहयोगी सुभासपा ने सात में से पांच सीटें जीतीं थीं।
बलिया में कई उलटफेर, बसपा का खुला खाता
बलिया में इस बार कई उलटफेर देखने को मिले हैं। सपा के दिग्गज नेता और नेता विरोधी दल रहे रामगोविंद चौधरी को हार का सामना करना पड़ा है तो वहीं भाजपा के दो मंत्री उपेंद्र राय और आनंद स्वरूप को भी हार मिली है। जबकि, दयाशंकर सिंह चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं। वहीं रसड़ा से बसपा के उमाशंकर सिंह ने दूसरी बार लगातार चुनाव जीतकर खाता खोला है। बलिया में रसड़ा, बेल्थरा रोड, सिकंदरपुर, बांसडीह, फेफना, बलिया नगर और बैरिया सीट है। खबर लिखे जाने तक इसमें दो-दो सीटें सपा और भाजपा ने जीत लीं हैं तो वहीं एक बसपा ने। बाकी की दो सीटों के परिणाम आने बाकी हैं।
अंबेडकरनगर में भी सपा का परचम
अंबेडकरनगर में भी इस बार भाजपा का दमखम दिखाई नहीं दिया है। सपा और बसपा (SP and BSP) के गढ़ माने जाने वाले इस जिले में एक बार फिर सपा ने परचम फहराया है। अंबेडकरनगर में पांच विधानसभा सीटें हैं। जिसमें कटेहरी, टांडा, आलापुर, अकबरपुर और जलालपुर थीं। 2017 में इसमें से दो पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी तो वहीं बाकी की सीटों पर बसपा जीती थी। सपा का खाता नहीं खुला था। लेकिन, इस बार बसपा के सभी दिग्गज नेता इस बार सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। खबर लिखे जाने तक सपा ने यहां से क्लीन स्वीप कर लिया है। अकबरपुर से रामअचल राजभर सीट बचाने में कामयाब रहे हैं। वहीं कटेहरी से लालजी वर्मा, टांडा से राममूर्ति वर्मा, आलापुर से त्रिभुवन दत्त और जलालपुर से बसपा सांसद रितेश पांडेय के पिता राकेश पांडेय ने सपा के टिकट पर चुनाव जीत लिया है।

