लखनऊ। यूपी चुनावी दंगल 2022 – समाजवादी पार्टी लखनऊ में अपनों की बगावत से घिरती दिख रही है। भाजपा जैसी कठिन विपक्षी पार्टी के सामने अपनों ने अखिलेश यादव की मुसीबतों को कई गुना बढ़ा दिया है। समाजवादी पार्टी लखनऊ की ग्रामीण सीटों पर अपनों से घिर चुकी है। जिसमें सरोजनीनगर, बख्शी का तालाब, मलिहाबाद और मोहनलालगंज की सीटें शामिल हैं। हालांकि नामांकन वापसी में अभी एक करीब एक सप्ताह का वक्त बचा है। ऐसे में इन बागियों को सपा कैसे डील करती है, यह देखने वाला होगा।
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सरोजनीनगर में शारदा प्रताप शुक्ला की बगातव से मुश्किलें
सरोजनीनगर में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों के ही प्रत्याशियों को लेकर खूब चर्चा रही। जब तक प्रत्याशी घोषित नहीं हो गए सियासी गलियारों में इसकी खूब बातें होती रहीं, इस बीच दोनों ही दलों ने अचानक से ऐसे प्रत्याशियों को उतार दिया है, जिनकी इस सीट को लेकर कोई चर्चा ही नहीं थी। सबसे पहले भाजपा ने अपनी वर्तमान विधायक और मंत्री स्वाती सिंह का टिकट काटा और ईडी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर आये राजेश्वर सिंह को टिकट थमा दिया। वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी की ओर से भी इस सीट को लेकर काफी उहापोह की स्थिति थी। माना जा रहा था कि इस सीट से सपा पूर्व कैबिनेट मंत्री और शिवपाल यादव के करीबी शारदा प्रताप शुक्ला को चुनावी मैदान में उतार सकती है लेकिन लखनऊ उत्तर से टिकट से मरहूम किये पूर्व कैबिनेट मंत्री और सपा के ब्राह्मण चेहरे प्रो. अभिषेक मिश्रा को सरोजनीनगर सीट का टिकट थमा दिया गया। हालांकि दावेदारों में बसपा छोड़कर आये शिवशंकर सिंह संकरी भी मैदान में थे। जैसे ही अभिषेक मिश्रा को टिकट देने का ऐलान हुआ, वैसे ही शारदा प्रताप शुक्ला ने निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय सुना दिया। अब शारदा प्रताप शुक्ला की इस बगावत से सपा की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। क्योंकि शारदा प्रताप शुक्ला की इस क्षेत्र में व्यक्तिगत पकड़ है और उससे सपा का ही नुकसान होना तय है।
मोहनलालगंज में सीटिंग विधायक बने बागी
2017 में भाजपा के प्रचंड लहर में भी मोहनलालगंज से सपा के अंबरीष पुष्कर विधायक बनकर आये थे। सपा ने इस बार भी उन्हें उम्मीदवार ऐलान किया था। लेकिन, अचानक मलिहाबाद से टिकट बदले जाने के बाद पूर्व सांसद सुशीला सरोज को यहां से प्रत्याशी बना दिया गया है। जिसके बाद अंबरीष पुष्कर अब बगावत पर उतर आये हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अगर अंबरीष पुष्कर अपना नामांकन वापस नहीं लेते हैं, तो सपा को यहां भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बीकेटी में दो दिग्गजों के भंवर में फंसी सपा
बख्शी का तालाब विधानसभा सीट पर सपा दो दिग्गजों के बीच भंवर में फंस गई है। इस सीट पर सपा ने पूर्व विधायक गोमती यादव को चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं दो बार इस सीट से विधायक रह चुके राजेंद्र यादव ने भी ताल ठोंक दी है। ऐसा माना जा रहा था कि सपा इस बार राजेंद्र यादव को चुनावी मैदान में उतार सकती है लेकिन गोमती यादव के नाम पर मुहर लगते ही बगावत के सुर सामने आ गए हैं। हालांकि दावा किया जा रहा है कि राजेंद्र यादव अभी भी सपा से ही नामांकन कर रहे हैं। गोमती यादव और राजेंद्र यादव भले एक ही पार्टी में हैं लेकिन दोनों के बीच सियासी दुश्मनी जगजाहिर है।
आमों की राजधानी मलिहाबाद में बगावत
दशहरी आमों की राजधानी कहे जाने वाली मलिहाबाद विधानसभा सीट पर भी सपा का पेंच फंस गया है। इस सीट पर सपा ने पूर्व सांसद सुशीला सरोज को टिकट दिया था। लेकिन बाद में उन्हें मोहनलालगंज भेजकर यहां से व्यापारी सोनू कनौजिया को चुनावी मैदान में उतारा गया है। पासी बाहुल्य इस सीट से भाजपा ने अपनी वर्तमान विधायक और केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की पत्नी जया देवी को चुनावी मैदान में उतारा है। सोनू कनौजिया के नाम का ऐलान होते ही सपा के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक इंदल कुमार रावत ने बागी तेवर अपनाते हुए कांग्रेस ज्वाइन कर ली है और वहां से टिकट लेकर आ गये हैं। इंदल कुमार रावत को स्थानीय तौर पर मजबूत चेहरे के रूप में जाना जाता है। ऐसे में सपा के लिए इंदल कुमार रावत का बागी तेवर भारी पड़ सकता है। हालांकि कुछ सपा के नेता यह दावा कर रहे हैं कि इंदल रावत और जया देवी दोनों ही एक समाज से हैं, ऐसे में इंदल रावत सपा को कम भाजपा को ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगे।

