खतौली। यूपी चुनावी दंगल 2022 – एक बार फिर से करतार सिंह भड़ाना खतौली की जनता के बीच हैं। इस बार भी वो 2012 की तरह वोट मांगते नजर आ रहे हैं। लेकिन इस बार परिस्थिति बदली हुई है। 2012 में वे रालोद से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। लेकिन इस बार वे बसपा से प्रत्याशी हैं। बसपा प्रत्याशी की छवि पैराशूट प्रत्याशी वाली बन गई है। इस बार माना जा रहा है कि बसपा प्रत्याशी करतार सिंह भड़ाना से खतौली का मतदाताओं का दिल नहीं मिल रहा। खुद खतौली क्षेत्र की जनता का कहना है कि जो नेता 2012 में चुनाव जीता गया। जिस पर इतना भरोसा करके जिताया वहीं चुनाव जीतने के बाद ऐसे गायब हुए कि अब 2022 में दिखाई दे रहे हैं। बसपा प्रत्याशी करतार सिंह भड़ाना जोकि पैराशूट प्रत्याशी के नाम से क्षेत्र में प्रसिद्ध हो गए हैं। 2012 के बाद करतार ने जनता से जो दूरी बनाई उसे दूर करने के लिए अब वे हर घर जाकर हाथ जोड़ रहे हैं। लेकिन उनको लेकर जनता के बीच जो नाराजगी बनी है वह दूर होती नहीं दिखाई दे रही। यदि मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण नहीं हुआ तो ऐसे में बसपा प्रत्याशी की नैया पार होना काफी मुश्किल होगा। हालांकि बसपा प्रत्याशी मुस्लिम मतों का अपने साथ होने का दावा कर रहे हैं लेकिन यह दावे हवाई हवा नजर आ रहे हैं।
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वहीं दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी विक्रम सिंह सैनी का भी लगातार विरोध होने से भाजपा प्रत्याशी को चिंता सताने लगी है। बता दे कि मंसूरपुर थाना क्षेत्र के मुनव्वर पुरा में सैनी समाज के लोगों ने भाजपा प्रत्याशी विक्रम सिंह सैनी के सामने ही भाजपा विरोधी नारे लगाए थे। कुछ इसी तरह से नारे खतौली की वाल्मीकि बस्ती में भी लगे जबकि प्रत्याशी का काफिला वहां पर पहुंचा। वहीं बात गठबंधन प्रत्याशी राजपाल सैनी पर भी लोगों की निगाहें लगी हुई है। यहां पर मुकाबला भाजपा और गठबंधन प्रत्याशी के बीच ही दिखाई दे रहा है। चुनावी दौड़ में बसपा प्रत्याशी काफी पीछे रह गए हैं। गठबंधन प्रत्याशी जाट—गुर्जर व सैनी समाज की वोट को साधने में लगे हुए हैं। वहीं बसपा प्रत्याशी मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश में हैं।

