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UP Election 2022: चुनाव परिणामों के इंतजार में योगी बनाम अखिलेश


UP Election 2022: चुनाव परिणामों के इंतजार में योगी बनाम अखिलेश

रंजीता सिन्हा

लखनऊ। यूपी इलेक्शन के एक्जिट पोल (UP Exit Poll) भले सूबे में एक बार फिर प्रचंड बहुमत के साथ बीजेपी की सरकार बनवा रहे हो, पर खुद सीएम योगी समेत पार्टी के दिग्गज नेताओं ने इस बावत कोई बड़े बोल नहीं कहे हैं। सोमवार की शाम मतदान की समाप्ति पर सीएम योगी ने केवल शांतिपूर्वक और पारदर्शिता के साथ विधानसभा चुनाव को सम्पन्न कराने के लिए सभी का धन्यवाद किया। वे चाहते तो बीजेपी के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह की तरह चुनाव बाद और मतगणना के पहले बड़े बोल नहीं कहे कि चाहे जो हो सरकार तो हम ही बनाएंगे।

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सच पूछिये तो विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण की मतगणना के बाद से ही सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने चुप्पी साध ली है। हालांकि मंगलवार 11 मार्च को इंटरनेशनल वूमेंस डे पर योगी ने अपने के ट्वीटर हैंडल से महिलाओं को बधाई दी लेकिन कोई राजनीतिक बयानबाजी से वे दूर रहे। योगी ही नहीं यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री व मौजूदा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह तक ने एक्जिट पोलों के बावत फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की।

यूपी के प्रशासनिक अमले में भी एक रहस्मयी सी शांति पसरी हुई है। इस चुनाव में साफतौर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच कांटे की टक्कर रही। ऐसे में मतदान बाद सामने आये एक्जिट पोलों के मद्देनजर जब हम पार्टीजनों का उत्साह और इनके पार्टी दफ्तरों की रौनक देखने जब हम निकले तो बीजेपी दफ्तर में एक अजीब सा सन्नाटा पसरा दिखा। वहीं सपा कार्यालय में हलचल तेज नजर आयी। सूबे के पूर्व सीएम व सपा प्रमुख अखिलेश यादव (SP chief Akhilesh Yadav) ने भी ट्वीट कर मंगलवार को जहां वूमेंस डे पर महिलाओं को बधाई दी वहीं इससे पहले सोमवार की शाम उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि सातवें और निर्णायक चरण में सपा-गठबंधन की जीत को बहुमत से बहुत आगे ले जाने के लिए सभी मतदाताओं और विशेषकर युवाओं का बहुत-बहुत आभार! हम सरकार बना रहे हैं!

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वहीं सीएम योगी (CM Yogi) का ताजा ट्वीट हलकी राजनीति से परे नैतिक राजनीति को संदेश देता नजर आता है। वे कहते हैं- याद रखना! कभी भी शॉर्टकट का रास्ता व्यक्ति को जीवन में सफल नहीं बना सकता। जीवन में अगर सफल बनना है तो हमें संघर्ष का रास्ता हमेशा चुनना चाहिए।

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गौरतलब है कि ज्यादातर एग्जिट पोल जहां बीजेपी की प्रचंड जीत की ओर इशारा कर रहे हैं, वहीं, समाजवादी पार्टी इस बार भी नंबर दो पर सिमटती नजर आ रही है। यूपी चुनाव की शुरुआत से सपा और बीजेपी के बीच ही मुख्य मुकाबला माना जा रहा है. यही वजह है कि सपा ने बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए रालोद समेत कई छोटी पार्टियों से गठबंधन किया था। यहां तक कि इस बार वे अपने चाचा शिवपाल यादव की पार्टी प्रसपा को भी साथ लाए थे. लेकिन 2017 और 2019 की तरह इस बार भी अखिलेश का दांव क्या उल्टा पड़ा? इसका जवाब भी 10 मार्च को मिल ही जाएगा।

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