By: Dheeraj Upadhyay
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पिछले तीन चरणों की 172 सीटों पर हुई वोटिंग में समीकरण जहाँ सपा गठबंधन के लिए अनुकूल था। वहीं चौथे चरण में भाजपा भी बेहतर प्रदर्शन कर यूपी की सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है। यूपी चुनाव के इस चौथे चरण में रुहेलखंड से लेकर तराई और अवध क्षेत्र में फैले 9 जिलों की 59 सीटों पर 624 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला बुधवार (23 फरवरी) को होगा।
Read also: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करती दिखाई दे रही भाजपा : सर्वे
इस चरण में सबसे ज्यादा 16 आरक्षित सीटें भी शामिल हैं जिसमें 85 फीसदी पर भाजपा का कब्जा है। इस चरण में चर्चित लखीमपुर-खीरी के साथ पीलीभीत, सीतापुर, लखनऊ, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, फतेहपुर और बांदा जिलों में भी मतदान होगा।
गौरतलब है कि 2017 यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 59 में से 51 सीटों पर अपना परचम लहराया था वहीं एक सीट उसके सहयोगी अपना दल (एस) को मिली थी। जबकि चार सीटे सपा, दो कांग्रेस और दो बसपा के खाते में गयी थी। इस चरण में सपा ने 58 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे है, जबकि 2 सीटों पर ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा मैदान में है। वहीं बसपा और कांग्रेस ने सभी 59 सीटों पर प्रत्याशी उतारे है, जबकि भाजपा के 57 और उसके सहयोगी अपना दल (एस) के तीन प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में है।
विदित है कि इस चरण में सूबे की राजधानी लखनऊ में भी मतदान होना है जिसकी 9 में से 8 विधानसभा सीटें भाजपा के पास है। वहीं किसान आंदोलन का केंद्र बिन्दु बने लखीमपुर में हिंसा के बाद यह पहला चुनाव होगा खासकर तब जब कुछ हफ्ते पहले ही 4 किसानो को जीप से कुचलने के आरोपी आशीष मिश्र जमानत पर छूटे हैं। चौथा चरण भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक तरफ भाजपा के सामने अपनी 51 सीटों को बरकरार रखने की चुनौती है तो दूसरी तरफ उसे तराई क्षेत्र में किसानों के प्रतिरोध के साथ बागियों और सांसद वरुण गांधी जैसे अपनों के भीतरघात से भी मुक़ाबला करना है।
Read also: पीएम ने किए झूठे दावे, मणिपुर के बुनियादी मुद्दों को नहीं छुआ : कांग्रेस
इसी चरण में कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले रायबरेली में भी मतदान होगा, जहाँ रायबरेली सादर से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह और हरचंदपुर के विधायक राकेश सिंह अब पार्टी छोड़ भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। चौथे चरण में एक तरफ जहां भाजपा के लिए अपना पुराना प्रदर्शन दोहराने के परीक्षा है तो वही कांग्रेस के लिए भी यूपी में अपना आखिरी किला बचाये रखने की चुनौती है।

