मेरठ। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 – आज भी बुदेंलखंड का अधिकांश इलाका दस्यु प्रभावित है। यहां पर समय समय पर ऐसे डाकू होते रहे हैं। जिनके सामने आने से पुलिस भी घबराती थी। गांव की सुरक्षा के लिए पीएसी तैनात की जाती है। लेकिन इसके बाद भी डाकू अपने मकसद में कामयाब हो जाते थे। ऐसे ही एक डाकू का नाम है शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ। जिसने करीब तीस साल तक चित्रकूट,बुंदेलखंड के अलावा मध्य प्रदेश और उप्र के पाठा इलाकों पर राज किया। ददुआ को इन इलाकों का बादशाह कहां जाता था। चित्रकूट, सतना, मानिकपुर, रीवा, बांदा, फतेहपुर, मैहर, इलाहाबाद जैसे जिलों में उसकी परछाई तक से लोग खौफ खाते थे। यहां तक कि इन जिलों में ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव तक में खड़े होने वाले प्रत्याशी ददुआ का अर्शिवाद लेने जंगलों की खाक छानते फिरते थे। जिसे ददुआ का अर्शिवाद मिला वो चुनाव जीत गया। ददुआ के आशीर्वाद के बिना ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा तक के चुनाव में खड़े होने की किसी की हिम्मत नहीं पड़ती थी।
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ददुआ की बंदूक की नाल पर जंगल में वोट की फसल लहलहाई और जिसको मन आया उससे कटवाई। ददुआ को बुंदेलखंड का वीरप्पन कहा जाता था। आज इस ददुआ को मरे हुए अरसा हो चुका है। लेकिन फिर भी प्रत्येक चुनाव में ददुआ का भूत जिंदा हो उठता है। सहानुभूति की लहर पर सवार मतदाता ददुआ के बेटे और भतीजे को जिताते आ रहे हैं। फतेहपुर में ददुआ का मंदिर है। इस बार विधानसभा चुनाव में वीर सिंह पटेल सपा से चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि इस बार दस्यु ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल पिता के नाम का लाभ मिलेगा। वीर सिंह चित्रकूट के मानिकपुर से चुनाव लड़ रहे हैं।
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15 साल पहले हुआ था आपरेशन ददुआ : चित्रकूट के मानिकपुर थाना क्षेत्र के पास झालवाल में 22 जुलाई 2007 को एसटीएफ ने मायावती की सरकार में ददुआ का सफाया किया था। उस दौरान ददुआ के सफाए को मयावती सरकार की बड़ी उपलब्धी माना गाया था।

