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US visit of Finance Minister: ‘भारत का ध्यान कौशल विकास और डिजिटलीकरण पर’

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वाशिंगटन। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक हफ्ते के अमेरिका दौरे पर हैं। अमेरिका में वित्तमंत्री भारत की तरफ से जी20 की मेजबानी कर रही हैंं। इस दौरान उन्होंने अमेरिका में विश्व व्यापार संगठन को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) और अधिक प्रगतिशील बने और सभी देशों की बात सुने।

उन्होंने कहा कि भारत का ध्यान कौशल और डिजिटलीकरण पर है। जिससे जीवन यापन, पारदर्शिता और अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने में अधिक आसानी हो। सीतारमण ने पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक थिंक टैंक में एक बातचीत में कहा कि सरकार का दृष्टिकोण गरीब लोगों को कम से कम बुनियादी सुविधाओं के साथ सशक्त बनाना है।

उन देशों की सुनी जानी चाहिए, जिनके पास कहने को कुछ है

सीतारमण ने शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स की ओर से आयोजित बातचीत के दौरान कहा कि मैं चाहूंगी कि डब्ल्यूटीओ अधिक प्रगतिशील हो, सभी देशों की बात सुने और सभी सदस्यों के प्रति निष्पक्ष रहे।” उन्होंने कहा कि सौभाग्य से मैंने 2014 से 2017 के बीच भारत के वाणिज्य मंत्री के तौर पर डब्ल्यूटीओ के साथ कुछ समय बिताया। सीतारमण ने कहा कि उसे उन देशों की आवाज सुनने के लिए अधिक जगह देनी होगी जिनके पास सुनने के अलावे कहने के लिए भी कुछ अलग है। उन्होंने जोर दिया कि डब्ल्यूटीओ के लिए आज का संदेश अधिक खुलापन होना चाहिए।

उदारीकरण की कीमत अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने चुकाई

उन्होने कहा कि आज अमेरिकी वाणिज्य मंत्री कैथरीन ताई के शब्दों को याद करना उपयोगी हो सकता है। उन्होंने हाल में कहा था कि पारंपरिक व्यापार दृष्टिकोण क्या है? वास्तव में बाजार को उदार बनाना क्या है? शुल्क में कमी के संदर्भ में वास्तव में इसका क्या अर्थ है? उन्होंने कहा, ‘अब ये सवाल ग्लोबल साउथ के कई देशों के मन में है।

यह एक ऐसा समय है जब विभिन्न देश इस बात पर विचार कर रहे हैं कि आप किस हद तक बाजार का उदारीकरण चाहते हैं? अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने इसकी कीमत चुकाई है, अमेरिकी वाणिज्य सचिव की चिंता उसी से संबंधित है। वर्ष 2014 और 2015 के दौरान वाणिज्य मंत्री के तौर पर मुझे भी ऐसा ही महसूस हुआ था। शायद मेरी अभिव्यक्ति को वैश्विक मीडिया में कभी जगह नहीं मिली, पर अब ग्लोबल साउथ के कई देशों की भी यही भावना है।’

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