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70 सीटों पर असर डालेगी चाचा-भतीजे की जोड़ी


70 सीटों पर असर डालेगी चाचा-भतीजे की जोड़ी

लखनऊ। लंबे समय से खिंची चली आ रही चाचा-भतीजे के बीच की दीवार विधानसभा चुनाव की आहट होते ही दरकनी शुरू हो गई थी। आज इस दीवार की आखिरी ईंट को ठोकर लगाते हुए अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल यादव के घर पहुंच गए। चाचा के घर से निकलते ही सपा मुखिया अखिलेश यादव ने चाचा की पार्टी प्रसपा के साथ गठबंधन करने का ऐलान कर दिया।

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गौरतलब है कि अखिलेश यादव के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके चाचा शिवपाल यादव नाराज हो गए थे। इसके बाद चाचा-भतीजे में तनातनी इतनी बढ़ी कीे शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी छोड़ कर अपनी पार्टी बना ली। प्रगतिशील समाज पार्टी बनाकर शिवपाल यादव ने प्रदेश भ्रमण शुरू कर दिया। हालांकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जैसे ही अखिलेश यादव ने क्षेत्रीय दलों को समाजवादी पार्टी के साथ जोड़ना शुरू किया तो शिवपाल यादव ने भी गठबंधन में शामिल होने की मंशा जताई। अनेक मौकों पर शिवपाल यादव ने सपा में शामिल होकर भाजपा को हराने की बात कही। लेकिन चाचा की गई बातों पर भतीजे ने कान नहीं धरा।

लेकिन हाल ही में ऐसे रुझान सामने आने लगे थे कि सपा और प्रसपा के बीच गठबंधन होने जा रहा है। माना जा रहा था कि मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर गठबंधन का ऐलान किया जाएगा। मगर ऐसा ना हो पाने पर संशय की स्थिति पैदा हो गई थी। लेकिन आज सपा मुखिया अखिलेश यादव अचानक चाचा शिवपाल यादव के घर पहुंचे और 45 मिनट तक उनसे बातें कीं। इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा की प्रगतिशील समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव जी से मुलाकात हुई और गठबंधन की बात तय हुईं।

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अखिलेश यादव ने लिखा कि क्षेत्रीय दलों को साथ देने की नीति सपा को निरंतर मजबूत बना रही है। सपा और अन्य सहयोगी को गठबंधन ऐतिहासिक जीत की ओर ले जा रहा है। माना जा रहा है कि शिवपाल यादव का साथ सपा को सांसे 60 से 70 सीटों पर लाभ दिला सकता है। पश्चिम, अवध और बुंदेलखंड के 10 जिलों की लगभग 70 सीटों पर शिवपाल यादव का अच्छा प्रभाव है। सहकारी समितियों पर कब्जा हासिल किए हुए शिवपाल यादव की पकड़ उत्तर प्रदेश के नौ प्रतिशत यादव वोट बैंक पर है जो आने वाले विधानसभा चुनाव में बड़ा प्रभाव डालने में सक्षम हैं।

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