कींव। पांच महीने से चल रही जंग में यूक्रेन की मदद के लिए अब अमेरिका लड़ाकू विमान भेजने की तैयारी कर रहा है। अगर अमेरिका अपने लड़ाकू विमान रूस के खिलाफ उतारता है तो इससे युद्ध और तेज होने का अंदेशा है। इस लड़ाई में पूरे विश्व में कई संकट पैदा कर दिए हैं। सबसे अहम संकट खाद्यान्न आपूर्ति का शुरू हो चुका है। हालांकि, इस दिशा में दोनों देशों के बीच गत शुक्रवार को यूएन की मध्यस्थता से एक बड़ा करार हुआ। व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने कहा कि यह कदम तत्काल नहीं उठाया जाएगा। अमेरिका और नाटो देश यूक्रेन की मदद पहले से कर रहे हैं। अमेरिका में बने लड़ाकू विमान भेजकर यूक्रेन को और अधिक मदद करने पर विचार किया जा रहा है। बहरहाल अमेरिका में बने लड़ाकू विमान भेजने की संभावना का पता लगाने के लिए रूस की खुफिया एजेंसिया लग गई हैं। यदि अमेरिका ने अपने लड़ाकू विमान यूक्रेन को भेजे तो इससे रूस और नाराज हो सकता है। इस लड़ाई में रूस और यूक्रेन दोनों को भारी नुकसान झेलनी पड़ रही है। हालांकि, रूस ने यूक्रेन के अधिकांश शहरों पर कब्जा कर लिया है। लेकिन लड़ाई का अंत अभी नजर नहीं आ रहा।
पांच महीने से जारी लड़ाई में अच्छी खबर यह आई कि रूस और यूक्रेन ने संयुक्त राष्ट्र के मध्यस्थता से ब्लैक सी से अनाज के निर्यात को बेरोकटक जारी रखने पर तैयार हो गए हैं। इस समझौते के बाद अब रूस, यूक्रेन के बंदरगाहों से निकलने वाले अनाज के जहाजों को नहीं रोकेगा। माना जा रहा है कि इसके बाद बढ़ते खाद्य संकट को दुनिया से टाला जा सकेगा। दोनों देशों के बीच समझौते पर तुर्की के डोलमाबाचे पैलेस में हस्ताक्षर किए गए हैं। बैठक में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और तुर्की के राष्ट्रपति तैयब रजब अर्दोआन मौजूद रहे। गुटेरेस ने बैठक के बाद कहा कि समझौते के माध्यम से यूक्रेन से खाद्य सामग्रियों के निर्यात का रास्ता खुला है। इससे विकासशील देशों को खाद्य संकट से निकाला जा सकता है।
