जम्मू। जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना ने नौशेरा सेक्टर के पास एलओसी पर घुसपैठ की बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया है। सीमा पर सुरक्षाबलों ने घुसपैठ की कोशिश कर रहे दो आतंकियों को ढेर कर दिया है। सर्च अभियान के दौरान दोनों घुसपैठिये आतंकी के शव बरामद कर लिए गए। फिलहाल इलाके में तलाशी अभियान जारी है। इलाके को चारों ओर से घेर लिया गया है। जिससे कि यह पता लगाया जा सके कि ढेर हुए घुसपैठियों के अलावा तो कोई और चोरी से सीमा पार से नहीं आया। जानकारी के अनुसार नौशेरा सेक्टर में एलओसी पर आतंकी घुसपैठ की कोशिश लगातार कर रहे हैं। लेकिन भारतीय सेना की सतर्कता के आगे आतंकियों की सभी कोशिशें नाकाम हो रही है। भारतीय सेना ने समय रहते कार्रवाई करके ऐसी ही आतंकियों की एक घुसपैठ की कोशिश को विफल कर दिया। क्षेत्र को चारों ओर से घेरकर सेना सर्च ऑपरेशन और तलाशी अभियान चला रही है।
नौशेरा सेक्टर में एक आतंकी सोमवार को पकड़ा गया था। उससे पूछताछ की जा रही है। भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा के नौशेरा सेक्टर में सेना ने फिदायीन हमले की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। जिस आतंकी को पकड़ा है वो फिदायीन हमले के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया था। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेस इंटेलिजेंस आईएसआई ने पहली बार फिदायीन हमले के लिए नया हथकंडा अपनाया है। अब फिदायीन आतंकियों को ट्रेड करके बिना हथियार के उनको घुसपैठ कराने की कोशिश की जा रही है। इनको एलओसी में घुसपैठ के बाद हथियार और असलहा दिया जाता है। जिसके बाद फिदायीन हमले की साजिश रचते हैं। आतंकी की पहचान 32 वर्षीय तबारक हुसैन निवासी गांव सब्जकोट कोटली पाकिस्तान के रूप में हुई है। सब्जकोट कोटली अधिकृत जम्मू.-काश्मीर में स्थित है। तबारक हुसैन पाकिस्तानी सेना के खुफिया विंग के लिए काम करता था। चौंकाने वाली बात यह है कि तबारक और उसके भाई हारून अली को अप्रैल 2016 में नौशेरा सेक्टर में घुसपैठ पर गिरफ्तार किया था। 26 महीने जेल में रहने के बाद दोनों भाइयों को वाघा-अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान भेज दिया गया था।
