क्या आप जानते हैं कि केदारनाथ से उत्तराखंड में भगवान शिव का दूसरा मंदिर है? हजारो साल पुराणी मान्यताओं को समेटे यह मंदिर अध्यात्म और प्रकर्तिक सौंदर्य का अनूठा संगम है. उत्तराखंड में पंच केदार में से एक माने जाने वाले तुंगनाथ मंदिर को दुनिया का सबसे ऊंचा शिव का मंदिर माना जाता है. उत्तराखंड की प्राकृतिक सौंदर्य से ओतप्रोत रास्तों से होते हुए आप रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ से होते हुए चोपता की ओर से बढ़ते हुए बांस के मनोहरीजंगलों को पार करके तुंगनाथ मंदिर पहुंचा जा सकता है.
विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर
तुंगनाथ मंदिर की समुद्र तल से ऊंचाई 3,680 मीटर (12,073 फीट ) है. जबकि बाबा केदारनाथ की 3,583 मीटर (11,755 फीट) है. आपको बता दें कि चोपता से तुंगनाथ मंदिर के लिए पैदल ही जाना पड़ता है आपकी इस पैदल यात्रा में आपको बुग्याल की सुंदर दुनिया से रूबरू होने का मौका मिलेगा. चोपता से तुंगनाथ मंदिर की दुरी करीब 3 किलोमीटर की है. करीब डेढ़ किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ने के बाद आपको चंद्रशिला नाम की चोटी के दर्शन होंगे जो “मून माउंटेन” के नाम से भी जानी जाती है. चंद्रशिला को लेकर मान्यता है की भगवान् श्रीराम ने रावण वध के बाद ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए यही पर भगवान् शिव की आराधना की थी. इसलिए इस स्थान को चंद्रशिला के नाम से जाना जाता है.
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तुंगनाथ मंदिर की धार्मिक मान्यता
हिमालय की खूबसूरत प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बना भगवान् तुंगनाथ मंदिर यंहा आने वाले पर्यटकों और यात्रियों के लिए खासे आकर्षण का केंद्र है. अपने आप में कई मान्यताओं को समेटे यह मंदिर पंच केदार में से दूसरे नंबर पर आता है. यंहा मंदिर में भगवान शिव की भुजाओं और ह्रदय की पूजा कीअविशर्मा ग्रेनाइट के पत्थरो से बने इस मंदिर को देखने के लिए हर साल हजारों यात्री यंहा आते है.
जुलाई-अगस्त में आना सबसे बेहतर
तुम नाथ पर्वत पर स्थित इस मंदिर में आने के लिए सबसे बेहतर समय जुलाई और अगस्त का रहता है. अधिक ऊंचाई पर होने से जनवरी फ़रवरी के समय सभी चोटियां बर्फ से ढकी रहती है. जो इसकी सुंदरता को और भी निखार देता है. लेकिन जुलाई और अगस्त के महीने में आपको मन लुभावन मिलो तक फैले घास के मैदान और इसमें खिले रंग बिरंगे फूल आपको अपनी और आकर्षित करेंगे.
