एक और आर्थिक पैकेज से अर्थ व्यवस्था सुधारने की कोशिश

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एक और आर्थिक पैकेज से अर्थ व्यवस्था सुधारने की कोशिश

उबैदउल्लाह नासिर

एक और आर्थिक पैकेज से अर्थ व्यवस्था सुधारने की कोशिश

एक ओर वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण ने अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने के लिए आज अपने तीसरे आर्थिक पैकेज का एलान किया जबकि अभी दो दिन पहले ही रिज़र्व बैंक ने कहा है कि भारत आर्थिक मंदी के दौर में चला गया है I श्रीमती निर्मला सीता रमण ने आज एक और आर्थिक पैकेज का एलान कर के अर्थ व्यवस्था को पटरी पर लाने की सराकर के प्रयासों को आगे बढ़ाया है I इससे पहले वित्त मंत्री ने केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए कई सुविधाओं का एलान कर के अर्थ व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश की थी I वास्तव में अर्थ व्यवस्था को गति देना का मूल मन्त्र यह है की खपत बढ़ाई जाय खपत बढ़ने से पैदावार बढ़ेगी पैदावार बढ़ेगी तो नए रोज़गार सृजित होंगे Iधनतेरस के शुभ अवसर पर उन्होंने जिस पैकेज का एलान किया है उस के तहत बेरोजगारों, अपना घर खरीदने की इक्षा रखने वालों किसानों मजदूरों के साथ छोटे व बड़े कारोबारियों को भी राहत दी है I कृषि के बाद रियल इस्टेट रोज़गार देने का एक महत्व पूर्ण सेक्टर है नोट बंदी के कारण यह सेक्टर सब से ज्यादा प्रभावित हुआ था बड़े बड़े अफसरों, मैनेजरों,इंजिनियरों से ले कर मेसन और निर्माण मज़दूर तक बेरोजगार हो गए थे, किसान अपनी ज़मीन भी नहीं बेच पा रहे थे इस सेक्टर में यह मंदी अभी तक जारी थी लेकिन आज सरकार ने इसके लिए पैकेज का एलान कर के इस सेक्टर में नई जान डालने की कोशिश की है I सरकार का अनुमान है कि इससे 78 लाख नए रोज़गार सृजित होंगे I नई स्कीम के अनुसार पहली बार घर बेचने में पहले सर्किल रेट और करार मूल्य में अंतर पर 10% की जगह 20% की छूट दी जायेगी, दो करोड़ की आवासीय इकाइयों के लिए यह छूट अगले साल 30 जून तक लागू रहेगी I

नौकरी पर बहाली के लिए प्रधानमंत्री भारत रोज़गार योजना का एलान किया गया है जिसके तहत lockdown के दौरान 15 हज़ार रुपया से कम वेतन पाने वालों या एक मार्च 2020 से ले कर 31 दिसम्बर तक नौकरी गंवाने वालों को राहत मिलेगी I EPFO के तहत रजिस्टर्ड संस्थाएं अगर नौकरी देती हैं तो उन्हें इस स्कीम का लाभ मिलेगा अगर किसी संस्था में 50 से कम कर्मचारी है और अगर वह दो से ज्यादा लोगों को नौकरी देती है तो उसे PF का अपना हिस्सा नहीं देना होगा और अगर 50 से ज्यादा कर्मचारी हैं और वह पांच लोगों को नौकरी देती है तो उसे इस स्कीम का फायदा मिलेगा यह योजना भी अगले साल 30 जून तक लागू रहेगी I उधर प्रवासी मजदूरों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोज़गार योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपया का प्रावधान किया गया है जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी I कृषि के लिए 65 000 करोड़ रुपया का प्रावधान किया गया जो खाद सब्सिडी में प्रयोग होगा I

कोविड सुरक्षा मिशन के तहत टीका के अनुसंधान के लिए 900 करोड़ का प्राविधान किया गया है I इस प्रकार सरकर अब तक 30 लाख करोड़ के पैकेज का एलान कर चुकी है जो हमारी GDP का लगभग 15% है I याद दिला दें की कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी समेत विपक्ष के कई नेता और रघु राम राजन समेत सभी बड़े अर्थशास्त्री मोदी सरकार से मांग करते रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था जो नोट बंदी GST और lockdown के कारण बुरी तरह पटरी से उतरी हुई है उसमें जान डालने के लिए जनता को सीधे नक़द धन मोहय्या कराया जाए ताकि बाज़ार में मांग बढे देर से ही सही सरकार ने इस ओर क़दम उठाना शुरू किया है ख़ास कर त्यौहार वह भी दीपावली और धनतेरस जैसे त्यौहार पर दिया जाने वाला यह पैकेज आवश्यक भी है और समयानुसार भी I हालांकि कोरोना के कारण त्योहारों का रंग फीका तो है लेकिन खरीदारी बढ़ेगी इससे इंकार नहीं किया जा सकता Iवित्त मंत्री का दावा है की अर्थव्यवस्था में सुधार के व्यापक संकेत मिल रहे हैं कंपनियों के कारोबार की गति का संकेत देने वाले कम्पोजिट परचेजिंग मेनेजर्स सूचकांक (PMI) अक्टूबर में 58.9% रहा जो पिछले महीने 54.6% था इस बीच उर्जा की खपत में 12% का इजाफा भी दर्ज हुआ और GST की वसूली 10% बढ़ी है, रेलवे की माल ढुलाई और बैंक से क़र्ज़ लेने में भी इजाफा दर्ज किया गया है I

लेकिन सच्चाई यह है की अर्थ व्यवस्था में सब कुछ अच्छा नहीं है रिज़र्व बैंक ने दावा किया है कि देश की अर्थव्यवस्था का आकार चालू वित्तीय वर्ष में 8.6% घट जायेगा I इस प्रकार लगातार दो तिमाहियों में GDP की गिरावट के साथ देश अपने इतिहास में पहली बार मंदी के चक्र में फँस गया है I लगातार तीसरी तिमाही में भी आर्थिक संकुचन का अनुमान है Iउधर आर्थिक पैकेज का प्रभाव देश के शेयर बाज़ार पर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है बाज़ार में लगातार आठ दिन की तेज़ी के बाद गिरावट दिखाई दी और वित्तीय शेयर में भी दबाव रहा I

यही नहीं खुदरा मंहगाई के मामले में भी consumers को बड़ा झटका लगा है Iखाने पीने की चीज़ों की कीमतों में इजाफे के कारण खुदर मंहगाई बढ़ कर 7.61 हो गयी है जो नौ महीने की सबसे ज्यादा दर है I इन आंकड़ों के आने के बाद रिज़र्व बैंक के लिये ब्याज दर घटा कर अर्थव्यवस्था को गति देने की कोशिश को झटका लग सकता है हालांकि वित्त मंत्री ने कहा है वह कीमतों में नियंत्रण के उपाय कर रही हैं जिसमे अल्प और मध्य अवधि के उपाय शामिल हैं I

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