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जाने आखिरी गांव तुरतुक के बारे में, जहां आपको मिलेगा रूहानी एहसास


जाने आखिरी गांव तुरतुक के बारे में, जहां आपको मिलेगा रूहानी एहसास

घूमना-फिरने के शौकीन है तो भारत देश में ही इतनी सारी जगहें हैं जिनको देखे बिना आपकी यात्रा अधूरी है। साथ ही सैर के लिए बहुत महंगे बजट की जरूरत नहीं पड़ती है। अगर आपको भी घूमने का शौक है तो देश के इस आखिरी गांव की सैर जरूर करें। तो चलिए जानें क्या है खास इस गांव में देखने के लिए।


तुरतुक नाम के इस गांव की खासियत यहां के खूबसूरत नजारे हैं। लद्दाख के आखिरी छोर पर बसा ये गांव अपनी सभ्यता और संस्कृति की वजह से भी खास है। खार दूंगला दर्रे में बसा ये गांव ऊंचे पहाड़ों के बीच बसा हुआ है। यहां पर बाल्टी संस्कृति के लोग रहते हैं। जिनकी भाषा और संस्कृति बिल्कुल अलग और अनोखी है।

अगर आप ट्रैकिंग के शौकीन है तो काराकोरम की पहाड़ियों पर जाएं। पर्यटकों की नजर से दूर लद्धाख के इस गांव की यात्रा एक अनोखा अनुभव देती है। यहां पर इंटरनेट की सेवाएं भी नहीं है। लेकिन इस गांव में मौजूद झरने का दृश्य बेहद खास है। 

दूर-दूर तक फैले घास के मैदान और लकड़ी के बने पुल को पार करने के  बाद जब आप इस झरने को देखते हैं तो रास्ते की सारी थकान मिट जाती है। तुरतुक गांव में ठहरने के लिए होटल कम मिलेंगे। लेकिन यहां के लोगों के घर में होमस्टे की सुविधा मिलेगी।

लद्दाख के इस खूबसूरत गांव में सबसे ज्यादा खुबानी की खेती होती है। यहां के बागानों में आपको खुबानी से लगदग पेड़ मिलेंगे। जो देखने में बहुत सुंदर लगते हैं। इसके साथ ही यहां पर अखरोट के भी बहुत से पेड़ नजर आ जाएंगे।

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