अमित बिश्नोई
- हैरानी की बात यह है कि यह बोली बीते 12 जून को लगाई गई है, जब सीमा पर तनाव चरम पर था
- चीन ने भारतीय सेना पर प्रोटोकाल के उल्लंघन का लगाया आरोप साथ ही कहा हम और झड़प नहीं चाहते
- दिल्ली-मेरठ सेमी हाई रेल कॉरिडोर का ठेका एक चीनी कंपनी को मिलने जा रहा
मेरठ : पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में बीति सोमवार रात चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल सहित 20 सैनिक शहीद हो गए है. पिछले पांच दशक से भी ज्यादा समय में सबसे बड़े सैन्य टकराव के कारण क्षेत्र में सीमा पर पहले से जारी गतिरोध और भड़क गया है. इस घटना के बाद एलएसी पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. तीनों सेनाएं हाइएस्ट अलर्ट पर है. इस बीच एक खबर निकल कर आई जिसका विरोध देश में होने लगा है. पीएम मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने चीन की कंपनी को 1126 करोड़ का ठेका दिया है. सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे लेकर गुस्सा जता रहे हैं. यूजर्स का कहना है कि वो यानी चीन हमारे जवानों की जान ले रहा है और हम उसे और मजबूत कर रहे हैं.ट्विटर पर उत्कर्ष सिंह नाम के यूजर ने लिखा, ‘सीमा पर जवान मर रहे हैं और सरकार चीनी कंपनी को ठेका दे रही है.’ खैर, आप चाइनीज झालर और एप का बहिष्कार करते रहिए.’फिलहाल, भारत और चीन के बीच सैन्य स्तर की बातचीत को रोक दिया गया है. रक्षा मंत्री ने नियंत्रण रेखा पर हालात की समीक्षा की है. साथ सेना को एलएसी पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मौजूदा स्थिति पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी बात की है.
लंबे समय से तनाव फिर ठेका क्यों दिया
भारत-चीन सीमा पर लंबे समय से तनाव चल रहा है. लोग चीन के प्रोडक्ट्स का बहिष्कार कर रहे हैं.तो दूसरी तरफ मोदी सरकार चीनी कंपनियों को बड़े-बड़े ठेके दे रही है. सोशल मीडिया में रितिक नाम के यूजर ने लिखा चीनी कंपनियों का दबदबा जोरों पर है और सरकार इसकी जड़ों में पानी दे रही है.
दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे का ठेका
बीति सोमवार रात खबर आई कि केंद्र सरकार की तरफ से बनने वाले दिल्ली-मेरठ सेमी हाई रेल कॉरिडोर का ठेका एक चीनी कंपनी को मिलने जा रहा है. दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) प्रोजेक्ट के अंडरग्राउंड स्ट्रेच बनाने के लिए सबसे कम बोली एक चीनी कंपनी शंघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (एसटीईसी) ने लगाई है. भाजपा की मोदी सरकार ने खुद चीनी कंपनी को 1126 करोड़ का ठेका दे दिया है. खबर है कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे का ठेका भी इसी कंपनी के पास है.हैरानी की बात यह है कि यह बोली बीते 12 जून को लगाई गई है, जब सीमा पर तनाव चरम पर था.प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनता को आत्मनिर्भर बनने की सलाह दे कर चले गए लेकिन चीनी कंपनी को ठेका देकर चीन को मजबूत बना रहे हैं.
कारगिल जैसा हमला ?
हाल ही मीडिया में रिपोर्ट्स आई थी कि चीन लद्दाख पर कारगिल जैसा हमला करने वाला है और बताया गया था कि चीनी सैनिक रात में होने वाली जंग का भी अभ्यास कर रहे हैं.भारत ने भी आक्रामक नीति अपनाते हुए अपनी ओर ‘दर्पण तैनाती’ कर दी है, जिसमें चीन के हर कदम की बराबरी की गई है. चीन लंबे वक्त से भारत-चीन सीमा यानी LAC पर खुद को मजबूत करने में लगा हुआ है.
सैनिकों को दी इमरजेंसी पावर
सरकारी सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख सीमा पर भारतीय सैनिकों को चीनी सैनिकों की भाषा में जवाब देने के लिए कह दिया है। चीनी सेना से निपटने के लिए पीएम मोदी ने सैनिकों को इमरजेंसी पावर भी दे दी है.साथ ही में भारतीय सैनिकों को सरकार के पूर्ण समर्थन का भी विश्वास दिलाया है. दूसरी और भारत चीन से डिप्लोमेटिक स्तर पर चीन से बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिश करेगी.
सर्वदलीय बैठक 19 को
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून को शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इस बैठक में अलग-अलग पार्टियों के अध्यक्ष शामिल होंगे. इस बैठक में भारत-चीन के बीच सीमा विवाद पर चर्चा की जाएगी.प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से बुधवार को किए गए ट्वीट में कहा गया, ‘भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति पर चर्चा करने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून को शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है. विभिन्न राजनीतिक दलों के अध्यक्ष इस वर्चुअल बैठक में हिस्सा लेंगे.’
क्या है दिल्ली-मेरठ RRTS प्रोजेक्ट
दिल्ली-मेरठ के बीच सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनना है. इस प्रोजेक्ट से दिल्ली, गाजियाबाद होते हुए मेरठ से जुड़ेगी. 82.15 किलोमीटर लंबे आरआरटीएस में 68.03 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड और 14.12 किलोमीटर अंडरग्राउंड होगा. इस प्रोजेक्ट से मुख्य रूप से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश जाने वालों को खासा फायदा होगा.

