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BBC दफ्तरों पर छापे/सर्वे की टाइमिंग

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अमित बिश्‍नोई
भारत में बीबीसी के दिल्ली और मुंबई के दफ्तरों पर छापा पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. आयकर विभाग की टीम पिछले तीन दिनों से बीबीसी ऑफिस में कागज़ातों को खंगाल रही है. क्या ढूंढ रही है, इसके बारे में अभी किसी को पुख्ता जानकारी नहीं है. वैसे IB मिनिस्ट्री के एक अधिकारी के मुताबिक बीबीसी को कई बार टैक्स की नोटिसें भेजी गयी थी लेकिन जब वहां से कोई रेस्पॉन्स नहीं आया तब ये कार्रवाई हुई है. अब आयकर विभाग की दुनिया के सबसे लोकप्रिय मीडिया हाउस पर इस तरह की कार्रवाई पर हंगामा मचना तो लाज़मी था क्योंकि एक तो इतना बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मीडिया हाउस और फिर कुछ ही दिन पहले रिलीज़ हुई उसकी गुजरात दंगों को लेकर बनाई गयी डॉक्युमेंट्री जिसे केंद्र सरकार ने भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है, यहाँ तक कि उसके वीडियो लिंक शेयर करने वालों की पोस्ट भी हटाई गयी हैं.

सरकार भले ही अपने बचाव में नोटिसों की बात कह रही है, भले ही छापे को सर्वे बता रही है लेकिन डॉक्यूमेंट्री और बीबीसी पर इस कार्रवाई को लोग एकसाथ ही देख रहे हैं और यही वजह है कि इंटरनेशनल मीडिया की बात छोड़ दीजिये। भारत में ही मीडिया से जुड़े प्लेटफॉर्म्स, फिर वो चाहे एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया हो या प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया, सरकार की इस कार्रवाई की घोर निंदा की है और इसे स्वतंत्र आवाज़ को चुप कराने का तरीका बताया है. एडिटर्स गिल्ड ने तो बड़े सख्त शब्दों में सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल कर डराने और परेशान का प्रचलन बढ़ता जा रहा है. कई मानवाधिकार संगठनों ने भी इस कार्रवाई के खिलाफ आवाज़ उठाई है.

उधर देश की राजनीतिक पार्टियां भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रही हैं. कांग्रेस पार्टी ने तो प्रधानमंत्री मोदी सवाल भी किया है कि 2014 से पहले इसी मीडिया संसथान पर आपको सबसे ज़्यादा भरोसा था, आप बीबीसी की विश्वसनीयता के अपनी चुनावी सभाओं में गुणगान करते थे तो अब क्या वो विशवास ख़त्म हो गया, वो विश्वसनीयता चली गयी, क्या बीबीसी के दफ्तरों पर यह छापे इसलिए पड़े क्योंकि उसने कुछ चुभते हुए सवाल पूछ लिए. कांग्रेस ही नहीं, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव , महबूबा मुफ़्ती और अन्य कई विपक्षी पार्टियों ने सरकार को घेरा है.

केंद्र सरकार के मंत्रियों और भाजपा भी इन राजनीतिक हमलों का मुस्तैदी से जवाब दे रही है, बल्कि गौरव भाटिया जैसे भाजपा के नेता तो उस बीबीसी का इतिहास ही खंगालने लगे जिसके प्रधानमंत्री मोदी कभी बहुत बड़े प्रशंसक थे. अनुराग ठाकुर जैसे मंत्री सीधे तौर पर धमकी देने लगे कि भारत में काम करना है तो कायदे में रहकर करना होगा। यहाँ तक कि गृहमंत्री अमित शाह का बयान भी यही संकेत देता है कि बीबीसी पर आयकर विभाग की कार्रवाई का डॉक्यूमेंट्री से कोई कहीं न कहीं कोई लेना देना ज़रूर है. अमित शाह इस सवाल पर कहते हैं सत्य सत्य ही होता है, वो सूर्य की तरह तेजस्वी बनकर ही बाहर आता है. ये लोग तो मोदी जी का पीछा 2002 से कर रहे हैं लेकिन मोदी जी हर बार सच्चे बनकर और जनता की ज़्यादा लोकप्रियता हासिल करके बाहर आए हैं.

सरकार इनदिनों काफी मुश्किलों में दिख रही है. हिंडेनबर्ग के बाद अडानी और पीएम मोदी को लेकर कांग्रेस पार्टी जिस तरह से सवाल उठा रही है उसपर सरकार से जवाब देते नहीं बन रहा है वो इस मुद्दे को लगातार डाइवर्ट करने के प्रयास कर रही है. हिंडेनबर्ग रिपोर्ट के बाद शेयर बाजार में अडानी के शेयरों में जिस तरह क भूचाल आया उसकी आंच सिर्फ भारत तक नहीं बल्कि देश के बाहर तक गयी है, विदेशी बैंकों और फण्ड मैनेजरों का जो रवय्या सामने आया है उससे भारत की साख पर बट्टा लगा है और भारत की साख पर बट्टा लगने का सीधा मतलब प्रधानमंत्री मोदी की साख पर भी कहीं कहीं पड़ता है. अब ऐसे में बीबीसी पर यह कार्रवाई कोढ़ में खाज जैसी कहीं न साबित हो जाय. वैसे सभी को मालूम है कि बीबीसी एक नॉन प्रॉफिटेबल संस्था है. ब्रिटेन के टैक्स पेयर इसकी फंडिंग करते हैं और ब्रिटिश सरकार उसकी निगरानी. ऐसे में इन छापे/ सर्वे में अगर ऐसा कुछ नहीं निकला जो बीबीसी को दोषी साबित कर सके तो सरकार के लिए यह और बड़ा झटका साबित होगा।

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