इधर दिल्ली में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत दिल्ली में सोनिया गाँधी से मुलाकात कर रहे हैं उधर गेहलोत खेमे के विधायक गोविंद राम मेघवाल धमकी दे रहे हैं कि अगर गेहलोत खेमे से अलग किसी को मुख्यमंत्री बनाया गया तो सामूहिक इस्तीफ़ा दे दिया जायेगा, मेघवाल ने कहा कि हम इस मामले में झुकने को बिलकुल तैयार नहीं चाहे इसके लिए हम लोगों को मध्यावधि चुनाव में भी न जाना पड़े.
उधर सोनिया गाँधी से मिलने से पहले गेहलोत ने कहा कि राजस्थान को लेकर जो कुछ चल रहा है वो पार्टी का आंतरिक मामला है और इसे हम आपस में बैठकर सुलझा लेंगे , इसमें किसी को परेशान होने की ज़रुरत ने है. उन्होंने राजस्थान की उठापटक को छोटी मोती घटना बताते हुए कहा कि ये सब मैं इंदिरा जी के समय से देखता आ रहा हूं. पार्टी हमेशा में अनुशासन रहती है. गेहलोत ने अपरोक्ष रूप से पार्टी की गिरावट कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी के चाहे 44 सांसद जीतकर आएं या 52 , कांग्रेस पार्टी देश में वह राष्ट्रीय पार्टी है और सोनिया गाँधी उसकी नेता। गेहलोत ने अपना दृष्टिकोण अलग होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि उनके हिसाब से आने वाले वक्त में महत्वपूर्ण फैसले होंगे.
बता दें कि गेहलोत इस समय डैमेज कंट्रोल के मूड में हैं, नामांकन दाखिल करने से पहले वो सोनिया गाँधी से मिलकर एकबार फिर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दें चाहते हैं, वहीँ उनके विरोधी गुट के नेता सचिन पायलट पिछले दो दिनों से दिल्ली में डेरा जमाये हुए हैं और सारी गतिविधियों पर अपनी नज़र बनाये हुए हैं, कहा जा रहा है कि दिल्ली में पायलट ने प्रियंका गाँधी से मुलाकात की है. 2020 में जब पायलट ने बगावत की थी तब प्रियंका गाँधी ने सचिन पायलट को वापसी के लिए राज़ी किया था. अभी देखना है कि सोनिया गाँधी से मुलाकात के बाद क्या बात सामने आती है.

