अमित बिश्नोई
देश में लागू नये आईटी नियमों का असर क्या इस बार साल 2022 के यूपी इलेक्शन में में भी दिखेगा? और इसके मद्देनजर तमाम राजनीतिक दल क्या एक-दूजे की शिकायत लेकर चुनाव आयोग भी पहुंचेगे, ठीक वैसे ही जैसे एक-दूसरे के प्रचार तरीकों और खर्चों को लेकर चुनाव आयोग का दरवाजा खटखठाते हैं? पहले अखबारों की फेक न्यूज पर आयोग की नजर रहती थी अब लगता है सोशल मीडिया और ऑन-लाइन न्यूज प्लेटफार्म भी चुनाव खर्च पर नजर रखने का अहम हिस्सा बनेंगे?
ये सवाल इसलिए अहम हो जाते हैं क्योंकि, एक ताजा निर्देश में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया को लेकर अहम निर्देश दिए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार करने वालों के खिलाफ कठोरता से कार्रवाई की जाए। फेक वीडियो, फेक न्यूज के प्रसार करने वालों से सख्ती से निपटें। सीएम के मुताबिक, साम्प्रदायिक उन्माद फैलाने की एक भी कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
असल में, कानूनी संरक्षण खत्म होते ही उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक मामला भी सामने आया है, जिसमें ट्विटर के खिलाफ फेक न्यूज को लेकर लोनी थाने में केस दर्ज किया है। ट्विटर के खिलाफ भारत में यह पहला केस दर्ज हुआ है।
इसी क्रम में यूपी सीएम योगी के ताजा आदेश को भारत सरकार के नए आईटी नियमों से जोड़कर देखा जा रहा है। जिसे नहीं मानने पर ट्विटर से भारतीय आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिली कानूनी सुरक्षा समाप्त कर दी गई है। गाजयिाबाद की पुलिस ने लोनी बॉर्डर पर अब्दुल समद के साथ हुई मारपीट और दाढ़ी काटने के मामले को धार्मिक रंग देने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिसमें ट्विटर के अधिकारी भी शामिल हैं।
लोनी बॉर्डर थाने में सब इंस्पेक्टर ने एफआईआर कराई है। आईपीसी की धारा 153, 153ए 295ए, 505, 120बी और 34 में केस दर्ज किया गया है।
मालूम हो कि, पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ कि अब्दुल समद के साथ जो मारपीट हुई थी वह उसके जानने वालों ने की थी। जांच में यह भी बात सामने आई कि मामले को धार्मिक रंग देने के लिए अफवाह फैलाई गई। पुलिस की जांच में हकीकत सामने आने के बाद भी ट्विटर व अन्य आरोपियों ने इस फेक न्यूज को नहीं हटाया।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
मोहम्मद जुबैर, राणा अयूब, द वायर, सलमान निजामी, मस्कूर उस्मानी, डॉ समा मोहम्मद, सबा नकवी, ट्विटर इंडिया और ट्विटर कम्युनिकेशन इंडिया प्राइवेट के खिलाफ लोनी थाने में केस दर्ज किया गया है।
पूरा मामला समझिये
यूपी के गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ था। इस मामले में पुलिस का कहना था कि बुजुर्ग द्वारा दी गई सारी जानकारी गलत थी। बुजुर्ग ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर करवाई थी, लेकिन वह उनको जानता था और वहां जबरदस्ती नारे लगाने जैसा कोई मामला नहीं हुआ। पुलिस की जांच में सामने आया है कि पीडि़त अब्दुल समद 5 जून को बुलंदशहर से बेहटा-लोनी बॉर्डर आया था, जहां से एक अन्य आदमी के साथ मुख्य आरोपी परवेश गुज्जर के घर बंथला-लोनी गया था। परवेश के घर पर कुछ समय में अन्य लड़के कल्लू, पोली, आरिफ, आदिल व मुशाहिद आदि आ गए और परवेश के साथ मिलकर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। उनके अनुसार अब्दुल समद ताबीज बनाने का काम करता है। उसके दिए ताबीज से उनके परिवार पर उल्टा असर हुआ। इस वजह से उन्होंने इस कारनामे को अंजाम दिया।

