नई दिल्ली। 1991 से खुर्शियों में आया अलगाववादी नेता यासीन मलिक जो कभी पाकिस्तान परस्त आतंकवादियों की कमान संभालता था। अब वो यासिन मलिक भारत के कानूनी शिकंजे में बुरी तरह से फंस चुका है। इस अलगाववादी यासिन मलिक को एनआईए की अदालत ने टेरर फ़ंडिंग मामलों में दोषी क़रार दिया है। हालांकि इस अलगाववादी आतंकी परस्त नेता को अभी सज़ा नहीं हुई है। लेकिन सजा सुनाने की तारीख कोर्ट ने 25 मई मुकर्रर की है।
साल 1991 में श्रीनगर में हुई गोलाबारी के बाद जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट और हिज़्बुल मुजाहिदीन के बीच ‘टर्फ़ वॉर’ के बीच एक अलगाववादी नेता यासीन मलिक का नाम सबके सामने आया। ये वो समय था जब कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन का टर्निंग पॉइंट था। काश्मीर के स्वतंत्रता समर्थक और उदारवादी जेकेएलएफ़ के लोग हिज़्बुल मुजाहिदीन के हाथों या तो मारे जा रहे थे। इस दौर में हिज़्बुल मुजाहिदीन को पाकिस्तान का समर्थन हासिल था। चरमपंथी न केवल इस्लाम के नाम पर लड़ते थे बल्कि कश्मीर को पाकिस्तान में शामिल करने के लिए मैदान में कूद पड़े थे। वहीं दूसरी ओर जेकेएलएफ ने 1994 में बंदूक छोड़ कश्मीर की आजादी के लिए एक शांतिपूर्ण संघर्ष की घोषणा की थी।
90 के दशक में कश्मीर आज़ादी की मांग करने वाले जेकेएलएफ़ का नेतृत्व यासीन मलिक के हाथ में था। जबकि हिज़्बुल मुजाहिदीन की कमान पाकिस्तान समर्थक सैयद सलाहुद्दीन के हाथ में थी। दोनों कटटरपंथी कभी एक साथ हुआ करते थे। काश्मीर में 1987 में हुए विधानसभा चुनाव में सैयद सलाहुद्दीन एक चुनावी क्षेत्र से प्रत्याशी था और यासीन मलिक उसका चुनावी एजेंट। इसी चुनाव में जेकेएलएफ़ का श्रीनगर क्षेत्र का पूर्व कमांडर सैफ़ुल्लाह भी सलाहुद्दीन का चुनावी एजेंट था।
सैफ़ुल्लाह और यासीन मलिक दोनों बचपन के दोस्त हुआ करते थे। बताया जाता है कि सलाहुद्दीन ने 1987 का चुनाव 35 हजार वोटों से जीता था। लेकिन इसके बाद भी उसको हरा दिया गया। इसमें यासीन मलिक पर आरोप लगे। उसके बाद से सलाहुदृीन और यासीन की राहे जुदा हो गई। इसके बाद यासीन मलिक कटटरपंथियों के नेता के रूप में उभरे और और उस पर भारत का एजेंट होने के आरोप हिज़्बुल मुजाहिदीन लगाती रही। अब जब यासीन मलिक एनआईए की अदालत में दोषी करार दिया गया तो सैफ़ुल्लाह इससे ख़ुश है।
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सैफ़ुल्लाह का आरोप है कि यासीन मलिक ने अपनी सियासत चमकाने के लिए उनके कई साथियों को अपने रास्ते से हटवाया और उन पर भारत विरोधी होने का आरोप लगाया। सैफ़ुल्लाह का कहना है कि आज अल्लाह ने अगर यासीन मलिक को सज़ा दी है तो ये इसके अपने गुनाहों की सज़ा भुगत रहा है। सैफ़ुल्लाह का कहना है कि जो हत्याएं 1996 में हुई थीं। तब से उसके और यासीन के बीच मतभेद थे।
