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रेलवे की फर्जी आईडी बनाकर ऐसे बेचते थे नकली E-Ticket, सॉफ्टवेयर के जरिए वारदात को दे रहा था अंजाम


रेलवे की फर्जी आईडी बनाकर ऐसे बेचते थे नकली E-Ticket, सॉफ्टवेयर के जरिए वारदात को दे रहा था अंजाम

नोएडा। साइबर सेल और आरपीएफ टीम ने संयुक्त कार्रवाई कर ऐसे गिरोह का भंड़ाफोड़ किया है जो कि सॉफ्टवेयर के जरिये यूजर आईडी बना देशभर में नकली ई-टिकट (E-Ticket)नाकर बेचने का काम कर रहे थे। टीम ने इनके सरगना को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से 20 आईडी, 50 नकली ई-टिकट के अलावा नकदी बरामद हुई है। आरपीएफ ने तीन माह पूर्व दादरी में एक साइबर कैफे संचालक समेत इस मामले में दो लोग गिरफ्तार किए थे। लेकिन सॉफ्टवेयर के जरिए कई लोग अलग यूजर आईडी बनाकर ये अवैध कारोबार कर रहे थे। इसका सरगना फरार था। गिरोह ने छह माह में लगभग एक करोड रुपये के नकली टिकट बेच दिए।

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रेल अधिकारियों को एक सीट पर दो टिकट बिकने का मामला सामने आया तो टिकटों की जांच की गई। इससे नकली ई-टिकट के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक एसके वर्मा ने बताया कि हेडक्वार्टर के साइबर सेल से मिली सूचना के बाद 20 दिसंबर को ग्रेटर नोएडा के दादरी के गांव समाधिपुर में रीवा इंटरनेट के नाम से चल रहे साइबर कैफे से ये नकली ई-टिकट बेचने धंधा किया जा रहा था। कैफे संचालक के नकली ई-टिकट (E-Ticket) बेचने की जानकारी होने पर टीम ने ग्राहक बनकर जांच की। आरोपी ने बातचीत के बाद ई-टिकट बनाकर दी। जिसके बाद आरपीएफ और साइबर अपराध शाखा की टीम ने छापा मारा और साइबर कैफे के संचालक रतीपाल को गिरफ्तार किया था। इस गिरोह का सरगना राकेश कुमार फरार हो गया था।

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आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि राकेश कुमार बिहार का रहने वाला है। आरोपी ने पढ़ाई के बाद पटना में सॉफ्टवेयर तैयार करना सीखा था। लेकिन आरोपी ने इस गुर को अच्छे काम में लगाने की जगह अवैध कारोबार में लगा दिया। राकेश ने सॉफ्टवेयर तैयार कर रेलवे की नकली ई-टिकट (E-Ticket) बनाने कारोबार शुरू किया था और कई लोगों को जोड़कर मोटी कमाई कर रहा था। सभी को आरोपी ने नकली ई-टिकट बनाने के लिए अलग-अलग यूजर आईडी दी थी।

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