मनुष्यों से लेकर जीव जंतुओं तक में सुनने की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है। सुनकर ही कई सारी गतिविधियों की प्रक्रिया संपन्न की जाती है। यदि सुनने में ही किसी तरह की रूकावट या परेशानी आ जाए तो मानव जीवन बेहद मुश्किल हो जाता है। अपने कानों की देखभाल और सुनने की क्षमता को दुरुस्त रखने के लिए समाज को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 3 मार्च को WORLD HEARING DAY का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष WORLD HEALTH ORGANIZATION द्वारा हियरिंग डे की थीम “चेंजिंग माइंड सेट्स: लेटस मेक ईयर एंड हियरिंग केयर ए रियलिटी फॉर ऑल ( मानसिकता बदल रही है: आइए, सभी को कान और सुनने की क्षमता की देखभाल को लेकर वास्तविक बनाएं) रखी गई है। सुनने की क्षमता बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ कई तरह की सलाह देते हैं। कई बार अपनी खुद की गलतियां या अन्य कारणों के चलते लोग सुनने की क्षमता का ह्रास कर बैठते हैं। चिकित्सक बताते हैं कि बहरापन मामूली समस्या के साथ शुरू होता है और बढ़ते – बढ़ते गंभीर हो जाता है। अक्सर लोग इसे अनदेखा करते हैं और परिणाम काफी घातक आते हैं। आईए जानते हैं ऐसे कुछ कारणों के बारे में जिसके चलते सुनने की क्षमता या बहरापन विकसित होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।
शोर – शराबा या ध्वनि प्रदूषण
सुनने की क्षमता का सबसे ज्यादा नुकसान ध्वनि प्रदूषण या शोर शराबे के कारण होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि अधिक समय तक शोर शराबे में रहा जाए तो कानों में बहरापन आने लगता है। अक्सर देखा गया है कि जो लोग सड़कों पर शोर शराबे के बीच में रहते हैं उनके सुनने की क्षमता कम मिलती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कानों की सेहत दुरुस्त रखने के लिए ध्वनि प्रदूषण से कानों को बचाना चाहिए।
एंटीबायोटिक्स या अन्य दवा
विशेष बताते हैं की दवाओं का अत्यधिक प्रयोग भी कानों पर विपरीत असर डालता है। इससे न केवल सुनने की क्षमता कम हो सकती है बल्कि बहरापन भी आ सकता है। इसके साथ ही अल्कोहल और तंबाकू उत्पादों का प्रयोग भी कानों की सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है।
अनुवांशिकी कारण
बहरेपन की एक समस्या का कारण अनुवांशिकी भी होता है। यदि परिवार में किसी को बहरापन हो या सुनने में परेशानी हो तो आने वाली पीढ़ी में भी यह समस्या उत्पन्न हो सकती है। वही विशेषज्ञ बताते हैं की जन्मजात बहरापन हो तो इसे रोका नहीं जा सकता है और इलाज के जरिए भी इसका पूर्ण निदान संभव नहीं होता है। आधुनिक चिकित्सा तकनीक के जरिए हियरिंग एड की सहायता से इस समस्या से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।
ट्रॉमा या दुर्घटना
दुर्घटना की वजह से भी बहरेपन की समस्या उत्पन्न हो सकती है। चिकित्सक बताते हैं कि यदि सिर पर चोट लगती है या इसके आसपास के किसी हिस्से पर किसी तरह का चोट का प्रभाव होता है तब भी कान प्रभावित हो सकते हैं और सुनने की क्षमता का नुकसान हो सकता है। वही बढ़ती उम्र के साथ भी बहरापन आने लगता है। अक्सर 50 साल के बाद लोगों में सुनने की क्षमता कम होने लगती है। 60 साल तक आते-आते 80 फ़ीसदी लोगों में कम सुनाई देने की समस्या देखी गई है।
कानों में मोम जमना
कानों की सफाई न होने के चलते उनमें मोम जमा होने लगता है। जिसकी वजह से कानों के संक्रमण की समस्या उत्पन्न हो सकती है। यदि इसका समय रहते इलाज न किया जाए तो मरीज में बहरेपन की समस्या उत्पन्न होने लगती है। धीरे-धीरे यह गंभीर हो जाती है और व्यक्ति पूरी तरह से बहरा भी हो सकता है।
