- कांग्रेस ने मेरठ और आगरा में प्रियंका गांधी की रैली को किया रद
- प्रदेश में कमजोर होती कांग्रेस को नहीं मिला अपेक्षित जनसमर्थन
न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जोर-शोर से उतरने का दावा करने वाली और खुद को सत्तारूढ़ भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बताने वाली कांग्रेस पार्टी को शुरुआत में ही झटके का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस महासचिव और पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी की मेरठ और आगरा में होने वाली रैलियों को रद्द कर दिया गया है। पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि जल्द ही इन रैलियों का आयोजन नई तिथि पर किया जाएगा। मगर सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को अपेक्षित जन समर्थन न मिल पाने के कारण महारैली में भीड़ जुटाना मुश्किल हो रहा था। इसलिए प्रियंका गांधी की इन रैलियों को रद्द कर दिया गया।
गौरतलब है कि 29 सितंबर को मेरठ के भैंसाली मैदान में प्रियंका गांधी की महारैली का आयोजन कांग्रेस पार्टी की ओर से किया जाना था। इस महारैली के लिए कांग्रेस पार्टी ने सारी तैयारियां कर ली थी और प्रशासन से भी अनुमति मिल चुकी थी। क्रांतिधरा मेरठ से शुरुआत करने के बाद पांच जोन में बांटे गए उत्तीर प्रदेश में रैली और यात्राओं का आयोजन किया जाना था। मगर ऐन मौके पर प्रियंका गांधी की मेरठ में होने वाली रैली को टाल दिया गया। अब इस रैली को अक्टूबर माह के दूसरे या तीसरे सप्ताह में आयोजित करने का दावा किया जा रहा है। इस रैली को स्थगित करने का कोई स्पष्ट कारण भी कांग्रेस पार्टी की ओर से नहीं बताया गया।
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वहीं 7 अक्टूबर को आगरा के रामलीला मैदान में होने वाली प्रियंका गांधी की रैली को भी स्थगित कर दिया गया है। आगरा में भी रैली के लिए तैयारियां शुरू की जा चुकी थी। प्रियंका गांधी की टीम ने दो दिन तक आगरा में रुक कर सारी व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया था। लेकिन यहां भी ऐन मौके पर रैली स्थगित कर दी गई। आगरा रैली को स्थगित करने का कारण यह माना जा रहा है कि सात अक्टूबर से शरदीय नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को अपेक्षित भीड़ न जुट पाने की आशंका थी। वहीं मेरठ में भी प्रियंका गांधी की रैली को लेकर जनता में उत्साह नहीं दिख रहा था। रैली फ्लॉप हो जाने के डर से कांग्रेस नेतृत्व ने इसको टालना ही बेहतर समझा।
लंबे समय तक उत्तर प्रदेश की सत्ताा पर एकतरफा काबिज रही कांग्रेस पार्टी के लिए निश्चित ही इससे मुश्किल वक्त नहीं हो सकता। विधानसभा चुनाव होने में लगभग 6 माह का ही समय बचा है और प्रियंका गांधी कांग्रेस का मुख्य चेहरा और स्टॉर प्रचारक हैं। प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश के भावी मुख्यमंत्री के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे में उनकी रैली में भीड़ ना जुट पाने की आशंका निसंदेह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की जडे़ कमजोर होने की ओर इशारा कर रही हैं।
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सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश कांग्रेस में इस समय असंतोष का माहौल है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के जल्द ही अन्य दलों में शामिल होने की चर्चाएं भी चल रही है। वही प्रियंका गांधी की रैली में कांग्रेस द्वारा अपने उम्मीदवार घोषित करने की उम्मींद पार्टी कार्यकर्ता से लेकर आम जनता तक लगाये बैठी थी। उम्मीदवार निश्चित न होने के कारण अपेक्षित जनसमर्थन भी कांग्रेस की ओर आता नहीं दिख रहा था। मगर चुनावी बेला में असमंजस की स्थिति में चल रही कांग्रेस यूपी में राजनीतिक दलों के महागठबंधन में शामिल होने पर कोई निर्णय नहीं ले पा रही है। वहीं महागठबंधन की ओर से भी कांग्रेस को अपेक्षित सीटें देने का आश्वासन नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस अभी तय नहीं कर पा रही कि वह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का जोखिम उठाएगी या महागठबंधन में शामिल होकर दी गई सीटों पर ही चुनाव लड़कर संतोष करेगी। असमंजस में डूबे कांग्रेस नेतृत्व को भय था कि यदि प्रियंका गांधी की रैली में भी भीड़ नहीं जुट पाई तो उससे पूरे प्रदेश में गलत संदेश जाएगा। ऐसे में पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल रैली को स्थगित करने का ही निर्णय लिया।

