23 मार्च को मेरठ में 1000 वर्ग फुट के प्लाट के लिए तीन लोगों ने अपने सगे भतीजे का बीच सड़क गला रेत डाला, जिस तरह से यह हत्याकांड हुआ और वीडियो में हत्यारे जिस बेखौफी से वारदात को अंजाम देते हुए दिखे, मन में सवाल उठा कि प्रदेश में कोई कानून व्यवस्था है कि नहीं, पुलिसिया निज़ाम कहाँ सोया हुआ है. सरकार तो अपराधी मुक्त यूपी का दावा कर रही है फिर यह कौन लोग हैं जो इस तरह खुले आम जघन्य अपराध कर रहे हैं, कौन हैं यह बेख़ौफ़ लोग जो प्रयागराज में एक हफ्ते के अंदर दस लोगों का नरसंहार कर देते हैं. ईंट पत्थरों से कुचल कुचल कर एक ही परिवार के लोगों को मार डालते हैं, इतना ही नहीं बल्कि उनकी सामूहिक हत्या करने के बाद उनके घर को आग के हवाले कर देते हैं.
कानपूर में प्रदेश के DGP प्रदेश में अपराध की कमी का दावा कर रहे होते हैं और पता चलता है कि पत्नी ने प्रेमी के संग मिलकर पति की हत्याकर शव को ज़मीन में गाड़ दिया। श्रावस्ती से खबर आती है कि व्यापारी के घर में घुसकर बदमाशों ने पत्नी को मौत के घाट उतारा। ऐसी ही अनेकों आपराधिक घटनाओं से रोज़ के अखबार रंगे पड़े होते हैं और इन सबके बावजूद सरकार और पुलिस अपराध पर पूरे कंट्रोल की बात करती है तो ऐसा लगता है मानों जनता मूर्ख है और इस तरह के दावे करके उसका एक तरह से मज़ाक उड़ाया जा रहा है।
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अभी योगी-2 सरकार को एक ही महीना हुआ है और हत्या की वारदातों की जो रफ़्तार है उससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आग़ाज़ अगर यह है तो अंजाम क्या होगा। अभी चुनाव के दौरान देश के गृह मंत्री अमित शाह यूपी में दूरबीन लेकर अपराधियों को ढूंढ रहे थे, दावे कर रहे थे कि यूपी अपराधियों से मुक्त हो गया इसलिए रामराज्य के लिए योगी जी को फिर जिताइये। भाजपा ने लोगों के बीच समाजवादी पार्टी की एक ऐसी इमेज गढ़ दी जो अपराधियों की समर्थक है, विशेषकर दलित समुदाय में यह सन्देश ठीक ढंग से पहुँचाया कि अखिलेश सत्ता में आये तो सपाई गुंडे तुम्हें फिर परेशान करेंगे। दलितों ने भी भाजपा की बातों में भरोसा किया लेकिन चुनाव बाद क्या हुआ, एक दलित युवक को सवर्णों के जूते चाटने पड़े।
आज अमित शाह से पूछा जाना चाहिए कि कहाँ है आपका अपराधी मुक्त उत्तर प्रदेश, आप तो कह रहे थे योगी राज में अपराधी या तो जेल में हैं या फिर प्रदेश छोड़कर भाग गए. फिर प्रयागराज में ताबड़तोड़ नरसंहार किसने किये, मेरठ जैसी घटनाओं को अंजाम किसने दिया। अपराधी मुक्त यूपी की बात शायद आपका चुनावी जुमला ही थी, आपने अपराधी मुक्त कहा था अपराधमुक्त नहीं। आप ही ने मोदी जी के 15 लाख के वादे को चुनावी जुमला कहा था, इसलिए अपराधी मुक्त यूपी की बात को भी हमें जुमला ही मानना चाहिए।
योगी-1 की अगर बात करें तो NCRB के आंकड़े चीख चीखकर कह रहे थे कि यूपी में पिछली सरकारों की तुलना में हर तरह का अपराध बढ़ा है, मगर सरकार चिल्ला चिल्लाकर कर कुछ और ही दावे कर रही थी. दिलचस्प बात तो यह थी लोग भी NCRB की जगह सरकार के दावों में यकीन कर रहे थे. योगी-2 में अपराध की जो रफ़्तार है उससे लगता तो यही है कि यह सरकार आने वाले सालों में अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ेगी। सरकार दावा करती है कि कोई भी व्यक्ति अपराध करके बचेगा नहीं, उसकी जगह जेल में होगी और उसके घर पर सरकारी बुलडोज़र चलेगा। लेकिन बड़ा सवाल तो यह है कि आपकी तमाम बुलडोज़र कार्रवाई के बाद भी प्रयागराज और मेरठ जैसे जघन्य अपराध क्यों हो रहे हैं।
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अपराध होने के बाद अपराधी को पकड़ना कोई तीर मारने वाला काम नहीं, अपराधी जुर्म करने के बाद पकड़ा ही जाता है, कभी जल्दी तो कभी देर में. ज़रुरत यूपी को अपराध मुक्त प्रदेश बनाने की है, अपराधी मुक्त तो अपने आप ही हो जायेगा। पिछले एक महीने में अपराधियों ने जिस प्रकार से घटनाओं को अंजाम दिया है उससे तो यही साबित होता है कि अपराध करने वाले बेख़ौफ़ हैं क्योंकि यह घटनाएं ऐसी नहीं हैं कि कोई आया और गोली मारकर चला गया. लोगों को ईंट पत्थरों से कुचलकर मारना, उन्हें जलाना, सरे राह भीड़ भरे बाजार में किसी का गला रेतना दर्शाता है कि इन्हें किसी से डर नहीं। इसलिए योगी जी दावों से परे हटकर अपना इक़बाल बुलंद कीजिये, अपराधियों में सही मायनों में खौफ पैदा कीजिये वरना अपराध को लेकर योगी-1 से भी बुरी हालत योगी-2 की होगी।

