Site icon Buziness Bytes Hindi

सरकार के दावों और प्याज़ की कीमतों में बहुत फर्क

There is a huge difference between government's claims and onion prices

प्याज़ की आसमान छोटी कीमतों ने घरों के किचन का बजट बिगाड़ दिया है, राष्ट्रीय राजधानी में प्याज की खुदरा बिक्री मूल्य 80 रुपये प्रति किलोग्राम को पार कर चुकी, देश के कई स्थानों पर तो प्याज़ का भाव 100 रूपये किलो तक पहुँच चूका का है. आम दिनों में 20 रूपये किलो बिकने वाला प्याज़ 100 रूपये में खरीदना पड़ रहा है, ऐसे में थोड़ी राहत की खबर मिली है , खबर के मुताबिक सरकार ने उम्मीद जताई है कि जनवरी में प्याज़ की कीमतें 57 रूपये तक आ जाएँगी। अब जब आप 80 और 100 रूपये किलो प्याज खरीद रहे हो तो 57 रूपये मंहगी होते हुए भी आपको प्याज काफी सस्ती लगेगी, इसी को व्यापार कहते हैं कि दाम इतना बढ़ाओ कि आधा रेट भी हो जाए तो भी आपको मोटा मुनाफा मिले और लोग भी सोचें कि दाम काफी कम हो गए हैं.

बता दें कि सरकार ने पिछले सप्ताह अगले साल मार्च तक प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। वहीँ प्याज से ज़्यादा तबाही तो लहसुन ने मचा रखी जिसके भाव 400 रूपये के भी पार हो गए हैं, नौबत यहाँ तक आ गयी हैं खुदरा छोड़े सब्ज़ी दुकानदारों ने लहसुन रखना बंद कर दिया। कलोनियों में सब्ज़ी का ठेला लेकर घूमने वाले सब्ज़ी वाले पीस के हिसाब से लहसुन बेच रहे हैं. लेने वाले भी एक दो लहसुन लेकर काम चलाने की कोशिश कर रहे हैं.

सरकार अपनी तरफ से इस बात की कोशिश तो कर रही है कि प्याज़ की कीमतें कम हों लेकिन उसकी कोशिश कारगर होती नहीं दिख रही हैं. उसके दावों और हकीकत में बहुत फर्क है, उसका तो दावा है कि प्याज़ 60 रूपये किलो से ज़्यादा कहीं नहीं बिक रही है लेकिन उसका दावा बिलकुल वैसा ही है जैसा बाजार में रेहड़ी पर फल बेचने वाला आवाज़ लगाता है कि सेब 100 रूपये में, और सस्ता सेब जानकार जब ग्राहक रेहड़ी पर जाता है तो उसे रेहड़ी के एक कोने में थोड़े खराब सेब मिलते हैं जिनके रेट की आवाज़ लगाकर रेहड़ी वाला ग्राहक को बुलाता है.

Exit mobile version