Site icon Buziness Bytes Hindi

इनके हुनर को दुनिया करती है सलाम


इनके हुनर को दुनिया करती है सलाम

शगुन के हाथ से सजे डेकोरेटिव आईटम ने दी उन्हें एक नई पहचान। घर बैठे बिजनेस करके नाम के साथ हो रही अच्छी कमाई

Zeba Hasan

एक महिला का स्वालंबी, आत्मनिभर होना उतना ही जरूरी है जितना जिंदगी को जीना। कुछ महिलाएं हलात और बदलावों के साथ समझौता कर लेती हैं लेकिन कुछ ऐसी भी महिलाएं हैं जो उल्झे रास्तों में भी अपने लिए राह निकाल लेती हैं। मेरठ की शगुन पोखरियाल (Shagun Pokhriyal) उन्हीं महिलाओं में से एक हैं। शादी होकर इलाहबाद से मेरठ आने वाली शगुन ने घर की जिम्मेदारियों को समझते हुए जॉब तो नहीं की लेकिन घर में रहते हुए ऐसा बिजनेस शुरू किया जिसने चार साल में ही उन्हें देश ही नहीं विदेश में पहचान दिला दी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) के मौके पर बिजनेस बाइट उनके जज्बे को सलाम करता है।


शादी हो या त्योहार, लोग चाहते हैं शगुन का ‘शगुन’

होली हो, दीवाला हो, गणेश पूजा हो या फिर किसी की शादी शगुन के बनाए हुए डेकोरेटिव आईटम हर किसी को पसंद आते हैं। बंधनवार, होली के रंगों से सजी थाली या फिर बर्थडे के लिए रिटर्न गिफ्ट, शगुन के हाथों की कारीगरी हर चीज को खूबसूरत बना देती है। अर्टीफिशल फूल, चूड़ियां, गोटा लचका, मोतियों से सजाकर वह अपने आईटम को इतना खूबसूरत बनाती हैं कि देखने वाले बस देखते ही रह जाते हैं। यही वजह है कि शगुन के बनाए डेकोरेटिव आईटम टैडिशल मौकों पर किसी शगुन से कम नहीं होते।

Read also: प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला संतों की भूमिका पर संगोष्ठी को करेंगे संबोधित


प्रेगनेंसी में आया था आईडिया

शगुन कहती हैं कि उनकी शादी को पांस साल हो गए हैं। वह इलाबाद में थीं और वहीं जॉब करती थी। शादी के बाद मेरठ आई तो जॉब छूट गई थी। फिर जब मैं प्रेगनेंट थी तब मैं घर में काफी बोर होने लगी थी। पूरा टाइम खाली बैठना मुझे पसंद नहीं था। उसी दौरान मैं इस बिजनेस के बारे में सोचा। मेरे पति भी मेरे मन की बात को समझते थे और उन्होंने भी मुझे मोटीवेट किया इस बिजनेस के लिए। अब तो चार साल से ज्यादा हो गए हैं मेरे काम को। मुझे सबसे पहला ऑर्डर बर्थडे के रिटर्न गिफ्ट का मिला था। मैंने पेंसिल बॉक्स को बहुत खूबसूरती से डेकोरेट किया था। बस उसके बाद से लोगों ने मुझे ऑडर देने शुरू कर दिए। इस हुनर के लिए ना मैंने कोई ट्रेनिंग ली है औश्र ना कोई कोर्स किया है।

Read also: मैंने डरना तो कब का छोड़ दिया है- पिया शर्मा


सोशल मीडिया ने किया है प्रमोट

चार साल के बेटे की मां शगुन कहती हैं कि मेरा काम तो 24 घंटे का होता है और मैं अपना काम बेटे के सो जाने के बाद ही ज्यादातर करती हूं। जहां तक बिजनेस प्रमोशन (Business promotion) का सवाल है तो सोशल मीडिया के जरिए ही मेरे काम को पहचान मिली है। मेरा फेसबुक पेज है, वॉट्एैप ग्रुप है और बस लोगों की जुबानी मेरे काम को बढ़ावा मिला है। मेरे यह आईटम्स यूएएस और ऑस्ट्रेलिया तक गए हैं। मैं कह सकती हूं कि इस काम ने ना सिर्फ मुझे मेरी पहचान दी बल्कि कामई का जरिया भी दिया है।

Exit mobile version