अमित बिश्नोई
संसद का बजट सत्र उम्मीदों के मुताबिक हंगामों के साथ आगे बढ़ रहा है. 23 जुलाई को बजट पेश होने के बाद पिछले दो दिनों से उसपर सदन में बहस चल रही है. प्रधानमंत्री अभी सदन से दूर हैं और उनके मंत्री विपक्ष के हमलों का मुकाबला कर रहे हैं , किस तरह कर रहे हैं इसे देश देख रहा है लेकिन पिछले दो दिनों की चर्चाओं की अगर बात की जाय तो तृणमूल कांग्रेस के डायमंड हार्बर सीट से सांसद और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में महफ़िल लूट लेने वाला भाषण दिया। अभिषेक का ये भाषण सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में है क्योंकि TMC सांसद ने जिस तरह से लोकसभा अध्यक्ष को आइना दिखाया, ऐसा लगा कि चोर पकड़ा गया. अभिषेक बनर्जी जिस बेबाकी और हाज़िर जवाबी से काम लिया उससे स्पीकर ओम बिरला मुंह छुपाते हुए नज़र आये, क्योंकि उनके पास तृणमूल कांग्रेस के सांसद के पलटवार का कोई जवाब ही नहीं था, एक तरह से खिसिया गए और अपनी खिसियाहट मिटाने के लिए बाद में वो उपदेश देने लगे.
दरअसल अभिषेक बनर्जी जब भाषण दे रहे थे तब ट्रेजरी बेंच की तरफ से काफी टोका टाकी हो रही थी और अभिषेक बनर्जी उस टोकाटाकी का मुंहतोड़ जवाब दे रहे थे और पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार के उन फैसलों की याद दिला रहे थे जिनको याद कर आज भी आम आदमी सिहर जाता है। अभिषेक जब GST के फैसले की याद दिलाकर सरकार को घेर रहे थे तब आसन पर बैठे ओम बिरला अपनी मुस्कराहट के पीछे अपनी बेचैनी छुपाने की लगातार कोशिश कर रहे थे लेकिन अंत में उनके सब्र का बाँध टूट गया और वो TMC सांसद को टोकने से खुद को रोक नहीं सके. स्पीकर महोदय ने कहा कि वो तो 2017 की बात थी, उसके बाद तो 2019 और 2024 का चुनाव भी हो गया, आज की बात कीजिये, बजट पर बात कीजिये। लेकिन स्पीकर महोदय को ये अनुमान नहीं था कि TMC सांसद जवाब में क्या बोलने वाले हैं. अभिषेक ने बड़े मुंहफट अंदाज़ में आसन पर एक तरह से सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि जब इसी सदन में लोग 60 साल पहले नेहरू और दुसरे नेताओं की बात करते हैं, आपातकाल की बात करते हैं तब आप कुछ नहीं बोलते, आप चुप हो जाते हैं और मैं नोटबंदी पर बोल रहा हूँ तो आप मुझे रोक रहे है, ये भेदभाव नहीं चलेगा।
अभिषेक के इस पलटवार से एक क्षण के लिए स्पीकर महोदय एकदम से सकपका गए और खिसियाते हुए बोले कि मैं सबको टोकता हूँ लेकिन अभिषेक के जवाब से वो तिलमिला ज़रूर उठे लेकिन जवाब इतना सटीक था कि वो चाहकर भी कुछ कह नहीं सके और न ही ट्रेज़री बेंच की तरफ से ओम बिरला को कोई सहयोग मिला। अभिषेक बनर्जी ने कहा वो T फॉर ट्रेजेडी की जो बात कर रहे हैं वो यही ट्रेजेडी है जो आज आप यहाँ कर रहे हैं. अभिषेक ने जब अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री का नाम लिया और टैलिप्राम्प्टर देखकर बोलने की बात कही तब भी ओम बिरला विचलित हो गए, दरअसल अभिषेक अपने भाषण के पॉइंट नोट कर के लाये थे और वो उसी को देखकर बोल रहे थे जिसपर सत्ता पक्ष तंज़ कर रहा था कि पढ़कर बोल रहा है, अभिषेक ने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई और कहा खुद का प्रधानमंत्री टैलिप्राम्प्टर देखकर बोलता है ये इन्हें नहीं दिखता। 56 मिनट के भाषण का समापन भी अभिषेक बनर्जी ने बड़े शानदार तरीके से ये कहते हुए किया कि कुर्सी का पेटी बाँध लो क्योंकि मौसम बदलने वाला है.
दरअसल विपक्ष जिस एकजुटता के साथ सरकार पर हमलावर है उससे निपटने में सरकार को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष के तीखे तेवरों और मज़बूती को देखते हुए कहा जा सकता है स्पीकर ओम बिरला के लिए 2019 की तुलना में 2024 बिलकुल अलग होने वाला है. पिछली बार वो जिस तरह से कमज़ोर विपक्ष को हैंडल कर रहे थे इसबार एक मज़बूत विपक्ष को उस तरह हैंडल करना आसान नहीं है. देखा जाय तो विपक्ष के पास सरकार को घेरने वाले मुद्दे भी हैं और उन मुद्दों पर मजबूती से अपने बात रखने वाले नेता भी हैं और यही वजह है कि विपक्ष के नेता स्पीकर को सीधे चैलेंज करते हुए नज़र आ रहे हैं जो ओम बिरला के लिए एक नया अनुभव है। विपक्ष से इस तरह पलटवार की उनकी आदत नहीं है और यही वजह है कि उनकी असहजता, बेचैनी और नाराज़गी बार बार ज़ाहिर हो रही है लेकिन विपक्ष पर उसका कोई असर नहीं पड़ रहा है. कल अभिषेक बनर्जी ने जिस तरह सरकार को घेरा और संवैधानिक पद पर बैठकर भी सरकार का बचाव करने की कोशिश कर रहे स्पीकर ओम बिरला को आईना दिखाया वो सच में दस वर्षों से शासन कर रही मोदी सरकार के लिए शुभ शगुन नहीं है.

