45 साल से अधिक आयु वालों के लिये जानलेवा हो रहा कोरोना
गंभीर बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों के लिये है कोरोना है खतरनाक
न्यूज डेस्क। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण 45 साल से अधिक आयु वाले लोगों के लिये जानलेवा साबित हो रहा है। बढ़ती उम्र वालों के लिये कोरोना का खतरा भी बड़ा है। इस भयावह सच को बयां करती है दूून मेडिकल काॅलेज की डेथ आॅडिट रिपोर्ट, जिसके अनुुसार अस्पताल में कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले 130 लोगों में से 105 लोग 45 साल से अधिक आयु के थे।
वहीं 18 से 45 आयु वर्ग में 24 लोगों की मौत कोरोना से हुई है। 18 वर्ष से कम आयु वर्ग में मात्र एक ही मौत हुई है। जाहिर है कि कोरोना सिर्फ 60 से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिये ही नहीं बल्कि 45 वर्ष के अधेड़ों के लिये भी जानलेवा है। खासकर उन लोगों के लिये जो पूर्व में किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। ऐसे में जब तब दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं के मंत्र का पालन करना बढ़ती उम्र के लोगों के लिये बेहद आवश्यक है।
हाल ही में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत ने राज्य में बुजुर्गों और पूर्व में गंभीर बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों के लिये कोरोना संक्रमण के जानलेवा साबित होने पर चिंता जताई थी। सीएम ने ऐसे लोगों को सर्वाधिक सावधानी बरतने और कोरोना के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श करने और लोगांे से परिवार के बुजुर्गों का विशेष तौर पर ध्यान रखने की अपील की थी।
सीएम त्रिवेंद सिंह रावत की चिंता जायज है क्योंकि उत्तराखंड में ही नहीं बल्कि कोरोना संक्रमण विश्वभर में बुजुर्गों के लिये जानलेवा साबित हो रहा है। कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़ों को देखें तो यह 45 साल से अधिक आयु वर्ग के लिये खतरनाक साबित हो रहा है। वहीं 60 साल से अधिक आयुु के बुजुर्गों के कोरोना संक्रमित हो जाने पर उनकी जान को खतरा काफी अधिक हो जाता है।
बढ़ती उम्र में कम होती रोग प्रतिरोधक क्षमता देती है कोरोना को हावी होने का मौका
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती उम्र के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। ऐसे में उनके संक्रमण का शिकार होने और कोरोना के कारण जान का खतरा अधिक होने की संभावना भी अधिक होती है। वहीं उम्र बढ़ने के साथ दिल, किडनी, फेफड़ों की क्षमता प्रभावित होती है और वह बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। वहीं आधुनिक जीवनशैली, तनाव और कई बार आनुवांशिकता के चलते डायबिटिज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां शरीर को घेर लेती हैं। ऐसे ही गैर-संक्रामक रोग से ग्रसित व्यक्ति के लिये कोरोना संक्रमण जानलेवा साबित होता है।
आयु बढ़ने के साथ हो जायें अधिक सावधान
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये सावधानियां बरतनी बेहद आवश्यक है। यदि आप पहले से ही किसी गैर-संक्रामक रोग से ग्रसित हैं तो आपको नियमित तौर पर दवा लेना बेहद आवश्यक है। आस-पास की सफाई के साथ शरीर की सफाई का भी ध्यान रखना जरूरी है। सिर के बाल, नाखून-दाढ़ी आदि को समय-समय पर साफ करना बेहद आवश्यक है। शरीर को आराम देने के लिये आठ घंटे की नींद लेना जरूरी है। किसी भी ऐसे स्थान जहां किसी भी प्रकार का संक्रमण फैलने की संभावना हो वहां जाने से परहेज करना बेहतर होगा। 60 साल से अधिक आयु वाले बुजुर्गों को बेहद आवश्यक होने पर ही घर से निकलना चाहिये। समय पर पौष्टिक भोजन करना और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य-पेय पदार्थों का सेवन कोरोना संक्रमण का मुकाबला करने में सहायक होगा। बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति चाहे वह परिवार का सदस्य ही क्यों न हो, के घर में आते ही तुरंत मिलने से दूरी बनायें। सबसे खास बात कि कोरोना के लक्षण दिखते ही लापरवाही न बरतें और तुरंत चिकित्सक से परामर्श करें। क्योंकि कोरोना संक्रमण से हुई मौतों का एक बड़ा कारण संक्रमित मरीज का देरी से अस्पताल पहुंचना भी है। मास्क, सेनेटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक है।