लखनऊ: बीते दिनों जोन छह स्थित अम्बरगंज में सीवर की सफाई के दौरान ज़हरीली गैस से दो सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश एक उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक पीड़ित परिवार से मिलने भी पहुंचे थे। वहीं उन्होंने ऐलान किया कि अब सुरक्षा उपकरण नहीं तो सफाई भी नहीं। वहीं, इस पूरे मामले पर लखनऊ के नगर आयुक्त अजय द्विवेदी ने एक कमेटी का भी गठन किया था जिसकी अध्यक्षता अपर नगर आयुक्त अभय कुमार पाण्डेय कर रहे हैं।
कमेटी को तीन दिन में अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी लेकिन अभी तक इस रिपोर्ट पर काम ही चल रहा है महापौर ने बताया की तीन दिनों में रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था, अबतक रिपोर्ट क्यों नहीं पेश की गई इसका अपडेट मैं स्वंय लूगीं. रिपोर्ट में देरी क्यों हुई, इसपर मैं नगर आयुक्त से चर्चा करूंगी. मैं स्वंय यह सुनिश्चित करूंगी कि जल्द रिपोर्ट पेश की जाए जिससे आगे की कार्यवाही सुचारू ढंग से हो. बता दें कि इस कमेटी में जलकल के जीएम, महाप्रबंधक जल विभाग गोमती प्रदूषण नियंत्रण इकाई, मुख्य अभियंता नगर निगम, मुख्य अभियंता आरआर तथा नगर निगम के मुख्य वित्त अधिकारी को शामिल किया गया है।
Read also: BSP के लिए मोर्चा संभालेंगे मायावती के भतीजे Akash Anand, जानिये क्या है पूरा मामला
सैकड़ों कर्मचारियों की हो चुकी है मौत
बता दें कि बीते कुछ सालों में हाथ से नालों की सफाई करते हुए सैकड़ों लोगों ने जान गंवाई है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की संस्था राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग 2020 में डराने वाले आंकड़े बताए थे। आंकड़ों के अनुसार, 2019 में सीवर की सफाई के दौरान 110 लोगों ने जान गंवाई। वहीं, 2018 में 68 और 2017 में 193 मौतें हुईं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी लगाई है फटकार
मैनुअल स्कैवेंजिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी केंद्र सरकार को फटकार लगा चुका है लेकिन इसका असर देखने को नहीं मिला है। हर बार कर्मचारियों की मौत के पीछे एक ही कारण होता है और वो है पर्याप्त उपकरणों का नहीं होना। नियमों के विरुद्ध सीवर में सफाई करने के लिए कर्मचारियों को उतारा गया है।
Read also: Lucknow News: यह ‘Diary’ रोकेगी लखनऊ शहर में अवैध निर्माण, LDA ने तैयार किया प्लान
मैनुअल स्कैवेंजिंग पूरी तरह से गैर कानूनी
मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट 2013 के तहत सीवर में सफाई के लिए व्यक्ति को उतारना गैर-कानूनी है। अगर सफाई कर्मचारियों को सीवर में उतारना पड़ जाए तो जो सीवर की सफाई के लिए उतर रहा है उसे ऑक्सिजन सिलेंडर, स्पेशल सूट, मास्क देना जरूरी है। वहीं, जलकल जीएम शैलेन्द्र वर्मा कि मानें तो कार्यदायी संस्था सुएज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सुपरवाइजर की लापरवाही के चलते ये हादसा हुआ है। उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है। नगर आयुक्त ने जिस कमेटी का गठन किया है उसकी रिपोर्ट जल्द ही पेश होगी। हालांकि, कार्यदायी संस्था के पर उपकरण मौजूद थे और अगर उपकरणों का इस्तेमाल किया गया होता तो ये हादसा नहीं होता।
