न्यूज डेस्क: सुलतान खाए देसी घी के पराठे तो तीन साल का राजा पांच फीट लंबा था। सोहराब को बादाम खाने के शौक ने खास बना दिया तो शाहरुख को पसंद हैं केले। वैसे तो आम इंसानों के लिए यह आम बाते हैं लेकिन यहां बात इंसानों की नहीं बल्कि बकरों की हो रही है जो इन दिनों बकरा मंडी की रौनक बने हैं। बकरीद का यह त्यौहार कुरबानी का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस त्यौहार में जो सबसे खास नजर आता है वह है बकरों का टशन। बकरीद महीने का चांद निकलते ही बकरों की मंडी सज जाती है जहां बकरों की खूबियों के अनुसार लगती है उनकी बोली। बकरों की खासियतों के अनुसार इनकी कीमत हजारों से लाखों तक जाती है।
आज पूरी रात बकरा मंडी रहेगी गुलजार
ईद-उल-अज़हा के मौके पर राजधानी लखनऊ की दुबग्गा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंडी में देशी और विदेशी नस्ल के हजारों बकरे बिक्री के लिए पहुंचे हैं।जिनकी कीमत 8 हजार से लेकर 6 लाख रुपये तक बताई जा रही है।बकरों की ऊंची कीमतों, अनोखी नस्लों और उनके खास नामों ने खरीदारों और दर्शकों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इसके अलावाअलावा पीठ पर प्राकृतिक रूप से ‘अल्लाह’ लिखे बकरों की चर्चा हर साल की तरह इस साल भी पूरे बाजार में हो रही है। इनकी कीमतें सामान्य बकरों की तुलना में काफी ज्यादा होती है। पिछले 10 दिनों से यह बकरा मंडी गुलजार है। अब जबकि बकरीद गुरुवार को है तो आज पूरी रात बकरों की मंडी गुलजार रहने वाली है।
मालिक आते हैं पुरी तैयारी से
कहते हैं ना कि जिसकी जितनी अच्छी मार्केटिंग होगी बाजार में उसे उतना ही अच्छी सेल मिलेगी। यह बात बकरा मालिक भी बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। तभी तो इन दिनों सोशल मीडिया तक बकरों की पहुंच हो चुकी है। बकरों की फोटो उनकी खासियतों के साथ पोस्ट की जाती है। वहीं जब बकरा मालिक बकरा मंडी पहुंचते हैं तो वह पूरी तैयारी के साथ पहुंचते हैं। लखनऊ के बुनियाद बाग में रहने वाले फैजी बकरा शाहरुख उनके सब बकरों में खास था क्योंकि उसकी पीठ पर चांद तारे जैसा निशान था। शाहरुख को केले पसंद थे तो फैजी रोज उसके लिए केले ही खिलाते थे। इस बकरीद पर फैजी ने अपने इस बकरे की कीमत लगाई थी 50 हजार। गले में फूलों की माला पहने इस बकरे ने लोगों का खूब ध्यान आकर्शित किया था। दुबग्गा बकरा मंडी में अजमेरी, जमुनापारी, तोता-परी, देसी बाबरी, पंजाबी और राजस्थानी नस्लों के बकरे बड़ी संख्या में लाए गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि बकरों की कीमत केवल नस्ल पर ही नहीं, बल्कि वजन, रंग, कद-काठी और विशेषताओं पर भी निर्भर कर रही है।
यह त्योहार कुरबानी का प्रतीक है ना कि बकरों की नुमाइश का
दुबग्गा मंडी में पीठ पर प्राकृतिक रूप से ‘अल्लाह’ लिखे बकरे के मालिक हरीश कुमार ने इसकी कीमत करीब 1 लाख रुपये रखी है। हरीश कुमार कहते हैं कि शुरुआत में उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि बकरे की पीठ पर क्या लिखा हुआ है। बाद में एक किसी ने उन्हें बताया कि उस पर ‘अल्लाह’ लिखा दिखाई दे रहा है। इसके बाद से बकरे का विशेष ध्यान रखना शुरू किया। बकरे खास खाना दिया गया और बेहद सम्मान के साथ उसकी देखभाल की गई। वहीं बकरा मंड़ी में बरबरी नस्ल के दो बकरे भी चर्चा में रहे। इनके मालिक ने इनकी कीमत 6 लाख रुपये बताई है। इस बकरे को पालने वालों का दावा है कि इनके उठने बैठने से लेकर इनका खान पान भी आम बकरों से अलग है। इनका नाम सुलतान और जैक रखा गया है। हालांकि मुस्लिम धर्म गुरुओं का यही कहना है कि यह त्यौहार कुरबानी का प्रतीक है नाकि बकरों की नुमाइशों का। हम कुरबानी अल्लाह की राह में देते हैं। इसलिए बकरा किस कीमत का है यह मायने नहीं रखता बल्कि हम यह कुरबानी किस नीयत से कर रहे हैं यह मायने रखता है।
