- एक मरीज के बाद दूसरे मरीज को देखने के बीच करीब 15 मिनट का अंतर दिया जाता है
- इस समय में पूरे रूम को छत सहित सैनेटाइज किया जाता है फिर दी जाती है एंट्री
मेरठ का एक क्लीनिक चर्चा में है. दरअसल, यहां मरीजों को तभी एंट्री मिलती है जब वह पीपीई किट पहन लें. क्लीनिक संचालक का कहना है कि दुनियाभर में 1 करोड़ से ज्यादा कोरोना संक्रमित हो चुके हैं.इंडिया की बात करें तो कोविड-19 की वजह से 5 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. ये फिगर इतने बड़े होने की वजह सोशल डिस्टेंसिंग को मेन्टेन न करना और कोविड-19 के प्रोटोकॉल को फॉलो न करना है. कोविड-19 से बचाव का बस एक ही विकल्प है और वो है सिर्फ और सिर्फ सावधानी. मेरठ की यदि बात की जाए तो यहां अनलाॅक-1 के दौरान तेजी से कोरोना पेशेंट्स बढ़ गए हैं. काफी संख्या में लोग कोरोना के दोस्त की तरह व्यवहार कर रहे हैं.मास्क की अहमितयत नहीं समझ रहे औ खुद के साथ लोगों के लिए भी मुसीबत खड़ी कर रहे हैं.
क्लीनिक में कैसे मिलती है एंट्री?
डेंटिस्ट डॉक्टर राजीव आनंद ने बताया कि हम पूरी सावधानी बरत रहे हैं. क्लीनिक में एंट्री तभी मिलती है जब पीपीई किट पहन लेते हैं. यह स्टेप इसलिए िलया गया है ताकि कोई भी शख्स कोविड-19 की चपेट में न आए. हम सभी को अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन करना होगा तभी हम कोरोना से जंग जीत सकेंगे. इसमें सभी मेरठवासियों का सहयोग जरूरी है. हमारी क्लीनिक में ये स्टेप लिए जा रहे हैं.
- गेट के अंदर जाते ही यहां मरीजों और तीमारदारों का रजिस्ट्रेशन होता है
- हाथों को सैनेटाइज कराया जाता है
- उसके बाद उन्हें भी पीपीई किट दी जाती है.
- क्लीनिक में मौजूद पूरा स्टाफ पीपीई किट में ही रहता है.
- एक मरीज को भी देखने के बाद यहां पूरा कमरा सैनेटाइज किया जाता है.
- फिर नई किट के साथ दूसरा मरीज देखना शुरू किया जाता है.

