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हिंदू महिला के शव को मुस्लिम समाज ने दिया कंधा


हिंदू महिला के शव को  मुस्लिम समाज ने दिया कंधा

मेरठ। न हिंदू बनेगा न मुस्लमान बनेगा, इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा। इसी गंगा-जमुनी तहजीब ने आज भी भारत का नाम दुनिया भर में रोशन किया हुुआ है। दो भाईयों की तरह हममें टकराव भी होता है मगर संकट के समय हम एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। चाहे वह संकट कोरोना काल का क्यों न हो, लेकिन मदद के लिये मानवता की मिसाल बनकर आगे आने वाले न जाति-धर्म देखते हैं न मौत का खौफ वह तो सिर्फ इंसानियत को अपना फर्ज समझ कर आगे बढ़ते जाते हैं।


कोरोना काल में जब लोगों ने एक-दूसरे से दूरियां बना ली हैं, रिश्ते-नाते कहीं पीछे छूट गये हैं। ऐसे में मेरठ से सामने आयी तस्वीरें आज भी मानवता के जिंदा होने का सुखद अहसास दिलाती हैं। मेरठ के हापुड़ स्टैंड के पास स्थित रामनगर मोहल्ले में एक बुजुर्ग महिला काफी समय से बीमार चल रही थी। महिला की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार की खबर रिश्तेदारों तक भेेजी गयी मगर कोरोना के खौफ सेे रिश्तेदारोें ने बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार में आने से दूरी बना ली। ऐसे में परिवार में मौजूद महिलाओं ने पड़ोसी मुस्लिम समाज के लोगों से मदद मांगी तो लोग खुद को रोक न पाये। देखते ही देखते मुस्लिम समाज के सैंकड़ों युवक वहां पहुंच गये और बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट गये।

मोहल्ला रामनगर से लेकर सूरजकुंड श्मशान घाट तक मुस्लिम समाज के युवक पैदल ही महिला के शव को कंधा देकर ले गये। हिंदू महिला के शव को मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा ले जाते देखकर लोग हैरत में पड़ जाते। लेकिन जब उन्हें असलियत मालूम पड़ती तो हिंदू-मुस्लिम भाईचारा देखकर उनकी आंखे नमः हो आती। यह इंसानियत कायम रहे, हम चाहे अच्छे हिंदू या अच्छे मुसलमान न बन सकें लेकिन अच्छे इंसान बनकर इंसानियत का फर्ज अदा करते रहे तो निःसंदेह ऊपरवाले को भी हम जैसे इंसान बनाने पर खुशी होगी। यह इंसानियत और भाईचारा हमेशा कायम रहे, आमीन…

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